अभी तक महज 20 मीटर गहरे गड्ढे के रूप में नजर आ रहे भूमिगत मेट्रो स्टेशन अब आकार लेने लगे हैं। स्टेशनों में नीचे जाने के लिए सीढ़ियों से लेकर कॉनकोर्स लेवल और ट्रेन के आने-जाने के लिए प्लेटफॉर्म तीनों स्टेशनों पर दिखने लगे हैं।
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लखनऊ मेट्रो
हुसैनगंज और चारबाग के बीच सुरंग की खोदाई का काम पूरा होने के बाद पूरे रूट का सिविल वर्क पूरा हो जाएगा।
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लखनऊ मेट्रो
मार्च तक का लक्ष्य मेट्रो ने इसके लिए तय किया हुआ है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद केवल ओएचई, यात्री सुविधाएं जैसे टोकन वेंडिंग मशीन, स्मार्ट कार्ड रिचार्ज मशीन, फेयर कलैक्शन यूनिट लगाए जाने का काम सितंबर तक पूरा करना बाकी रहेगा।
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लखनऊ मेट्रो
मेट्रो का भूमिगत रूट 3.5 किमी. लंबा है। यहां हुसैनगंज, हजरतगंज और सचिवालय स्टेशन बनाए जाने हैं।
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लखनऊ मेट्रो
भूमिगत रूट पर सबसे अधिक तेज काम सचिवालय स्टेशन पर ही चल रहा है। दावा है कि मेट्रो स्टेशन बनाने का काम भी सबसे पहले यहीं पूरा होगा।
कॉनकोर्स लेवल के बाद यहां प्लेटफॉर्म लेवल का काम भी अब पूरा होने वाला है। हुसैनगंज और हजरतगंज स्टेशनों पर अब एस्कलेटर्स लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।