यूपी विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम पद का तोहफा दिया है। केशव का जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा रहा है।
विज्ञापन
2 of 6
पीएम मोदी की तर्ज पर केशव के पिता की भी चाय की दुकान थी। कौशांबी के सिराथू कस्बे में केशव चाय की इस छोटी-सी दुकान में पिता को सहयोग करते थे। यहीं से उन्होंने राजनीति का ककहरा सीखा। केशव ने काफी दिनों तक अखबार भी बेचा। केशव मौर्य का जन्म 7 मई 1968 को कौशांबी के सिराथू में हुआ था।
विज्ञापन
3 of 6
अयोध्या आंदोलन के दौरान वे विहिप से खासे प्रभावित हुए और इससे जुड़ गए। 14 साल की उम्र में ही उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और इलाहाबाद आकर विहिप का कामकाज संभालने लगे। जल्द ही वह विहिप के दिग्गज अशोक सिंहल के चहेते बन गए। 1989 से 2002 तक उन्होंने विहिप में तमाम महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने 1997 में हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से बीए की परीक्षा पास की।
4 of 6
अयोध्या आंदोलन के दौरान वे विहिप से खासे प्रभावित हुए और इससे जुड़ गए। 14 साल की उम्र में ही उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और इलाहाबाद आकर विहिप का कामकाज संभालने लगे। जल्द ही वह विहिप के दिग्गज अशोक सिंहल के चहेते बन गए। 1989 से 2002 तक उन्होंने विहिप में तमाम महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने 1997 में हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से बीए की परीक्षा पास की।
विज्ञापन
5 of 6
वे उस समय पहली बार विधायक बने जब प्रदेश में सपा की आंधी चल रही थी। 2014 में केशव फूलपुर से भाजपा के टिकट पर पहली बार सांसद बने। पिछड़ा वर्ग से होने के नाते उन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। केशव के परिवार में पत्नी व दो पुत्र योगेश और आशीष हैं।
इलाहाबाद में करवाई राष्ट्रीय कार्यकारिणी
पिछले साल प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद में पहली बार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करवाई। बैठक के बाद पीएम मोदी ने भी उनकी पीठ थपथपाई थी। केशव भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने विहिप के प्रांत संगठन मंत्री का दायित्व भी निभाया। वे भाजपा की राष्ट्रीय परिषद में भी रह चुके हैं।