गोसाईगंज के मल्लूखेड़ा में टनल पास में छिपे बैठे तेंदुए को करीब 24 घंटे बाद वन विभाग की टीम पकड़ सकी। पूरे दिन-रात चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे उसे ट्रैंकुलाइज करने के बाद तीन स्टाफ डॉक्टर टनल के अंदर रेंगकर तेंदुए तक पहुंचे और उसे काबू में कर किया। पिंजड़े में कैद कर टीम ने तेंदुए को लखनऊ जू पहुंचाया है। पकड़ा गया तेंदुआ व्यस्क नर है। रेस्क्यू के दौरान उसे हल्की चोटें भी आई हैं। उसका इलाज किया जा रहा है।
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- फोटो : amar ujala
गोसाईगंज के मल्लूखेड़ा में टनल पास में छिपे बैठे तेंदुए को करीब 24 घंटे बाद वन विभाग की टीम पकड़ सकी। पूरे दिन-रात चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे उसे ट्रैंकुलाइज किया गया। फिर तीन स्टाफ डॉक्टर टनल के अंदर रेंगकर तेंदुए तक पहुंचे और उसे काबू में कर किया। पिंजड़े में कैद कर टीम ने तेंदुए को लखनऊ जू पहुंचाया है। पकड़ा गया तेंदुआ व्यस्क नर है। रेस्क्यू के दौरान उसे हल्की चोटें भी आई हैं। उसका इलाज किया जा रहा है।
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सूचना पर पहुंची पुलिस-वन विभाग की टीम ने सुबह 11 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन देर रात तक भी तेंदुआ काबू में नहीं आ सका था। ‘टनल पास’ के मुहाने पर पिंजड़ा लगाने के साथ 10 मिनी ब्लास्ट के बाद भी तेंदुआ बाहर नहीं निकला। इस पर टीम ने देर रात ‘पास थ्रू प्लान’ पर काम शुरू किया पर सफलता न मिली। दो महकमों में सामंजस्य न होने से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरुआती घंटों में बेहद धीमा चला, जिसे शाम को पहुंचे जू के विशेषज्ञों ने तेजी दी।
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सुबह बीमारी की हालत में रेस्क्यू ऑपरेशन में नहीं पहुंच सके जू के उपनिदेशक और रेस्क्यू विशेषज्ञ डॉ. उत्कर्ष शाम करीब पौने पांच बजे पहुंचे। उन्होंने ‘टनल पास’ के भीतर झांकने के बाद पिंजड़े के मुहाने को सीधे टनल से जोड़कर 20 मिनट में जेसीबी हटवाई। तब कहीं जाकर डॉक्टरों, वन महकमे के अफसरों के साथ मीडियाकर्मियों ने भी कैमरे के फ्लैश चमका कर अंदर बैठे तेंदुए की पहली झलक देखी।
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विशेषज्ञों ने पाया कि तेंदुआ टनल के दूसरे मुहाने पर 35-40 फीट पीछे दुबका बैठा है। टीम ने उसे निकालने को ब्लास्ट का सहारा लिया। 6 बजे से लेकर 45 मिनट तक टीम ने रह-रह कर 10 पटाखे दूसरे छोर से टनल में दगाए पर तेंदुए ने मूवमेंट तक नहीं की। बाद मे टनल में धुआं भरने के चलते टीम ने प्लान को ड्रॉप कर दिया।
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देर रात तक पटाखे और रस्सा डालकर उसे खींचने का प्रयास किया गया लेकिन तेंदुआ टस से मस नहीं हुआ। इसके बाद सुबह वन विभाग की टीम ने गन से उसे ट्रैंकुलाइज किया। फिर तीन स्टाफ डॉक्टर टनल पास के अंदर रेंगते हुए घुसे और तेंदुए को काबू में कर लिया।
इसके बाद तेंदुए को पिंजड़े में कैद कर टीम उसे लखनऊ जू लेकर पहुंची। यहां जांच में तेंदुए के व्यस्क नर होने को पुष्टि हुई है। उसे हल्की खरोचें आईं हैं, जिस पर टीम ने मरहम पट्टी किया है।