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युवा गायिका हर्षदीप की आवाज के साथ लखनऊ महोत्सव को अलविदा, तस्वीरें

Sat, 03 Feb 2018 02:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ महोत्सव में प्रस्तुति देतीं हर्षदीप कौर।
छोटे परदे के रिएलिटी शो से निकलकर कई कलाकारों ने अपनी पहचान बनाई है, लेकिन युवा गायिका हर्षदीप कौर की विशिष्ट पहचान है तो इस कारण कि उनकी गायकी का मिजाज सूफियाना है।
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हर्षदीप कौर
लखनऊ महोत्सव की समापन निशा शुक्रवार को उनके गीतों से खूब सजी। उन्होंने देर तक अपने गाए और अपनी पसंद के गीतों की प्रस्तुतियां कीं।
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हर्षदीप कौर
कौर ने पार्श्व गायन करते हुए कई लोकप्रिय गीत अपने नाम किए हैं। कतियां करूं, हीर, इक ओंकार, जालिमा, नच दे ने सारे, कबीरा, जुगनी जी... जैसे कई लोकप्रिय गीतों को हर्षदीप ने अपनी आवाज दी है।

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हर्षदीप कौर
इन गीतों के अतिरिक्त किन्ना सोना तुझे, लंबी जुदाई, मैंनू इक पल चैन न आए, अल्लाह हूं, मैं कमली, आ जा रे माही, कर ऐतबार मेरा... के साथ ही हर्षदीप ने आ जाने की जिद ना करो... और छाप तिलक सब छीनी... जैसे गीत और सूफी रचनाएं भी कौर ने खूब सुनाई।
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स्‍थानीय कलाकार
सूफियाना गीतों के बाद स्थानीय कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी। वाणी शर्मा और पंकज खंडेलवाल के दल ने आज बिरज में होरी रे रसिया... पर प्रस्तुति दी तो तो प्रीति सिंह एवं साथियों ने आयो रे ऋतुराज आज होरी खेलन आयो... तथा रंग डारन नंद के लालन पे... होली गीत सुनाए।
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स्‍थानीय कलाकार
आज बिरज में होरी रे रसिया पर प्रस्तुति केे देखकर दर्शक भक्ति के रस में डूब गए।
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लखनऊ महोत्सव।
चार वर्षीया स्वरा त्रिपाठी ने नृत्य किया तो वंदना मिश्र ने गीत सुनाया। युवा गायक उत्सव श्रेय ने मैं किसी से कहूंगा नहीं और मेरे मन ये बता दे तू... जैसे फिल्मी गीत सुनाए।
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लोक गायिका वंदना।
अनूप जलोटा को अपना आदर्श मानने वाले शिवांग ने बोल पिंजरा का तोता.. रचना सुनाई। कमलेश यादव एवं साथियों ने सरस्वती वंदना एवं लोकगीत सुनाए। लोक गायिका वंदना ने भी कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनोरंजन किया।
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