27 साल पहले बोडो आतंकवादियों की हिंसा के बाद भड़के दंगों में जबड़ों में गोली खाने वाले और पिता समेत परिजनों को गंवाने वाले असम कोकराझार के अमर कुमार दत्ता। 27 साल से जबड़े में फंसी गोली आज भी लिए घूम रहे हैं। इनके जबड़े में आज भी वो गोली फंसी है। जानिए इनकी कहानी...
विज्ञापन
2 of 6
सद्भावना यात्रा
- फोटो : amar ujala
दंगों में खुद मरते-मरते बचे, परिजनों को खोया, शिक्षा भी नहीं हो सकी, अभी तक शादी भी नहीं की है। लेकिन दंगों मे मरने वाली मानवता को जिंदा रखने की अपील करने 3500 किमी. की जंबो यात्रा पर निकले हैं। अकेले 41 वर्षीय अमर ही नहीं उनके साथ युवाओं की ऐसी टीम भी मोहब्बत का पैगाम लेकर कोकराझार से कश्मीर तक शांति सद्भाव यात्रा पर निकली है ताकि देश अब कश्मीर सा न बनने पाए या कोकराझार का दंश न झेले।
विज्ञापन
3 of 6
अमर कुमार दत्ता
- फोटो : amar ujala
गोली अब तक क्यों नहीं निकाली या इससे कोई दिक्कत नहीं होती तो इस पर उन्होंने जवाब दिया, जब गोली लगी उस वक्त परिवार को खो दिया था, माली हालत भी ठीक नहीं थी। मैंने लोकल स्तर पर डॉक्टरों से इलाज करवा लिया पर गोली नहीं निकल पाई। आगे चलकर इससे कोई दिक्कत नहीं हुई तो निकलवाने की कोशिश नहीं की। छूने पर ये आज भी महसूस होती है। साथ ही मुझे ये अपने मिशन की याद दिलाती रहती है।
4 of 6
सद्भावना यात्रा
- फोटो : amar ujala
बृहस्पतिवार लखनऊ से गुजरते समय युवा यात्रियों ने इमामबाड़े की भी सैर की। शाम को गांधी भवन में सर्व सेवा संघ की ओर से हुए सम्मेलन में शिरकत की और लोगों को अमनचैन का संदेश दिया। बोडो ट्राइब, मुस्लिम, राजबांसी, बंगाली और असमिया लोगों समेत 13 लोगों की साइकिल यात्रा की अगुवाई कर रहे संघ के मंत्री चंदन पाल ने बताया कि कश्मीर स्वर्ग है तो कोकराझार भी पूरब का स्वर्ग है। कुदरती खुबसूरती में हिंसा ने दखल दशकों पहले दिया।
विज्ञापन
5 of 6
सद्भावना यात्रा
- फोटो : amar ujala
आलम ये है कि पिछले चार सालों में कोकराझार, चिरांग, बक्सा समेत कई इलाकों में हिंसा ने लोगों को झकझोरा है। लोग शांति अमन सद्भाव का संदेश दे रहे हैं, लेकिन युवाओं ने इसे पूरे देश भर में फैलाने का निर्णय लिया।
53 दिनों तक साइकिल से असम कोकराझार से कश्मीर श्रीनगर तक 3500 किमी. की यात्रा में लखनऊ तक लगभग 1400 किमी. की यात्रा पूरी हुई है। गांधी भवन में शाम को हुए सम्मेलन में संघ की पूर्व अध्यक्ष राधा भट्ट, शुभा प्रेम, शेख हुसैन, वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी, संदीप समेत तमाम ने विचार रखे। यात्रा शुक्रवार सुबह को संडीला के लिए रवाना होगी।