चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार में कोई मधुमेह से पीड़ित है तो उसे मरीज की तरह देखते हुए उसके खानपान और दिनचर्या पर पूरी तरह रोक नहीं लगानी चाहिए, बल्कि पूरे परिवार को खानपान में धीरे-धीरे बदलाव लाना चाहिए। इससे मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति मानसिक रूप से खुद को बीमार महसूस नहीं करेगा। परिवार के अन्य सदस्य भी सुबह टहलने लगें तो पूरा परिवार फिट हो जाएगा। यह बीमारी आनुवंशिक भी होती है। यह बड़ों के साथ ही बच्चों को भी गिरफ्त में ले रही है। भारत की करीब पांच फीसदी आबादी मधुमेह की चपेट में है। मधुमेह सिर्फ मीठी चीज खाने से नहीं होता है। मोटापा, तनाव, अवसाद बीमारी की प्रमुख वजहें हैं। मधुमेह को लेकर संजय गांधी पीजीआई के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रो. सुभाष यादव से बातचीत की गई। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
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प्रो. सुभाष यादव
- फोटो : अमर उजाला
क्या होता है मधुमेह है ?
शरीर में कई तरह के हार्मोन होते हैं। इसी में से एक इंसुलिन है। जब पैंक्रियाज (अग्नाशय) में इंसुलिन बनना कम हो जाता है तो खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। इसे मधुमेह कहते हैं। इंसुलिन के कम होने पर शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है। रक्त में शुगर की मात्रा अधिक होने से आंख, दिमाग, हृदय, गुर्दा सहित शरीर के अन्य अंगों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। कितने तरह की होती है यह बीमारी?
मधुमेह तीन तरह की होती है। टाइप वन ज्यादातर छोटे बच्चों या 20 साल से कम उम्र के लोगों में पाई जाती है। इसमें खून में शुगर की मात्रा सामान्य रखने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। टाइप टू में शरीर में इंसुलिन बनता है, लेकिन जरूरत के हिसाब से नहीं होता है। ज्यादातर लोग इसी से पीड़ित होते हैं। इसकी बड़ी वजह मोटापा होती है। यह अनुवांशिक भी होता है। तीसरी जेस्टेशनल डायबिटीज है, जो गर्भावस्था के दौरान होती है। यह बच्चे के जन्म के बाद खुद ही खत्म हो जाती है।
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कैसे पहचानें लक्षण ?
बार-बार पेशाब आना, रोशनी कम होना, प्यास ज्यादा लगना और कमजोरी महसूस करना मधुमेह से प्रमुख लक्षण हैं। इसमें भूख खूब लगती है, लेकिन वजन घटने लगता है। शरीर में किसी स्थान पर चोट लग जाती है तो उसे भरने में लंबा वक्त लगता है। इसका लेबल बढ़ने पर चक्कर आने, हृदयगति प्रभावित होने और किडनी खराब होने का भी खतरा रहता है। बचाव का तरीका क्या है?
खाना बदल-बदल कर खाएं। सलाद, हरी सब्जी, फल का प्रयोग ज्यादा करें। ज्यादा देर खाली पेट न रहें। पेट का खाली रहना और ज्यादा खाना, दोनों नुकसानदेह है। खाना एक बार में खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा तीन से चार बार में खाएं। रेसेदार चीजों का सेवन बढ़ाएं। उम्र 35 से 40 साल की है तो छह माह में एक बार शुगर की जांच करा लें। शुगर बढ़ी हुई है तो चिकित्सक से सलाह लें। चंद दवाओं से यह नियंत्रित हो जाती है।
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क्या योग से फायदा होगा?
मधुमेह में योग और एक्सरसाइज भी जरूरी होता है। कपालभाति, अनुलोम-विलोम और प्राणायाम से काफी लाभ मिलता है। योग किसी योग शिक्षक से सीखने के बाद करना चाहिए।
मधुमेह में क्या-क्या नहीं खाना चाहिए?
जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक से पूरी तरह से बचना चाहिए। चीनी से बनी चीजें और चाय ज्यादा नहीं लेनी चाहिए। तैलीय चीजों का सेवन न करें। शरीर को जितनी कैलोरी की जरूरत है, उससे अधिक खाना खाने पर वह वसा के रूप में जमने लगता है। ऐसे में उसे पचाने के लिए शारीरिक श्रम जरूरी होता है। मानसिक तनाव और अवसाद से बचने की कोशिश करनी चाहिए। तनाव की स्थिति में इंसुलिन कम बनता है और शुगर का स्तर बढ़ जाता है। धूम्रपान कत्तई न करें। सिगरेट, तंबाकू, शराब से पूरी तरह दूरी बना लें। रात में हल्का और नौ बजे तक खाना खा लें। उम्र 40 साल से अधिक है तो मलाई वाला दूध न लें।
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क्या आलू, चावल नहीं खाना चाहिए?
ऐसा नहीं है। यह निर्भर करता है कि शुगर लेवल कितना है। चीनी से बनी चीजों का परेहज करें। आलू, चावल पूरी तरह से बंद नहीं करना चाहिए। हां, इतनी ही मात्रा लें कि वह आसानी से पच जाए। इसके लिए जरूरी होता है कि डायटीशियन से चार्ट बनवा लें। व्यक्ति की उम्र, लंबाई और वजन के हिसाब से डाइट चार्ट तैयार किया जाता है।
इस रोग से मुकाबला के लिए क्या सलाह देंगे? पार्टी में पेटभर नहीं, सिर्फ स्वाद के लिए : ध्यान रखें कि शादी-विवाह या पार्टी में कम से कम खाना खाएं, क्योंकि उसमें कैलोरी बहुत ज्यादा होती है। इसे स्वाद के लिए खाएं। तमाम मरीज ऐसे आते हैं कि 10 दिन परहेज किया। शुगर नियंत्रित थी। लेकिन पार्टी में चले गए। तब से बढ़ी हुई है।
शुगर से डरे नहीं : मधुमेह बहुत बड़ी बीमारी नहीं है। कुछ परहेज, जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। शुगर लेवल बढ़ जाए तो उसे नियंत्रित करने की कोशिश शुरू कर देनी चाहिए। लापरवाही से शुगर नियंत्रित होने के बजाय शरीर के दूसरे अंगों को भी बीमार बनाने लगता है।