अली सरदार जाफरी बड़े शायर होने के साथ आंदोलनकारी भी रहे। एक बार वह आंदोलन करते हुए गिरफ्तार हो गए। उन दिनों कर्नल जाफरी नाम के सज्जन प्रदेश की जेलों के बडे़ अधिकारी हुआ करते थे। जैसे ही उन्हें लखनऊ जेल के जेलर के सामने ले जाया गया तो जेलर उठकर खड़े हो गए और बोले, ‘अरे जनाब! आप तो बहुत बड़े आदमी हैं।
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अली सरदार जाफरी
- फोटो : डेमो
मैं बहुत गरीब आदमी हूं। मेरी एक विधवा बहन है। एक बेटी भी है। घर की बड़ी जिम्मेदारियां हैं। आपको कोई तकलीफ न होने पाएगी।’ सरदार जाफरी की समझ में नहीं आया कि माजरा क्या है? जेलर ने उन्हें कुर्सी पर बैठाया और चाय पिलाई।
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अली सरदार जाफरी
- फोटो : amar ujala
किसी काम से वह उठकर कहीं चले गए। डिप्टी जेलर आया और उसने सरदार को सी क्लास बैरक में बंद कर दिया। वहां तमाम पेशेवर अपराधी बंद थे। सरदार परेशान। तभी जेलर साहब डिप्टी जेलर को डांटते हुए आए। सरदार जाफरी ने लखनऊ की पांच रातें में लिखा है। ‘मेरे पास आकर जेलर बैरक खुलवाते हुए कहने लगा, ‘माफ करिएगा, इनसे गलती हो गई। आपको यहां भेज दिया। कर्नल साहब सुनेंगे तो कितना बुरा मानेंगे।’
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अली सरदार जाफरी
- फोटो : डेमो
मैं कुछ समझ पाता कि उससे पहले ही जेलर ने मुझे सी क्लास से निकालकर बी क्लास में भेज दिया। जहां चंद्रभानु गुप्त, क्रांतिकारी जयदेव कपूर और शिव वर्मा भी थे। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। पर, लोगों ने बताया कि जेलर ने मुझे जेल के बड़े अधिकारी कर्नल जाफरी का दामाद समझ लिया है।