फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नाक से खून निकलने पर हो जाएं सतर्क, हो सकते हैं इस बीमारी के शिकार, बच्चों में पाई जाती है यह डिजीज

Thu, 02 May 2019 01:39 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
विज्ञापन
1 of 7
डेमो
नाक से बार-बार खून आए और सांस लेने में दिक्कत हो तो उसे गंभीरता से लें। इस समस्या को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें। खून निकलने की वजह नाक के पिछले हिस्से में ट्यूमर हो सकता है। यह बीमारी आमतौर पर लड़कों में होती है। लड़कियों में एकाध केस पाए जाते हैं। इसके पीछे बड़ी वजह हार्मोनल माना जा रहा है। केजीएमयू में अब आयुष्मान योजना के तहत भी इस मर्ज का ऑपरेशन होने लगा है। दो दिन पहले आयुष्मान में पहली सर्जरी की गई है।
विज्ञापन

2 of 7
डेमो
बलरामपुर निवासी रामलौटन (15) के दाहिनी आंख की रोशनी धीरे-धीरे कम हो गई। उसके नाक से लगातार खून बह रहा था। परिवारीजन इसे नकसीर फूटना मान रहे थे, लेकिन यह समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी। इस पर परिवार के लोग उसे लेकर केजीएमयू आए। यहां ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एचपी सिंह ने जांच की। ब्रेन की एमआरआई कराई गई। इसके बाद पेरिफेरल नर्वस सिस्टम (पीएनएस) की जांच में बीमारी पकड़ में आई। जांच में पता चला कि उसके नाक के पिछले हिस्से में ट्यूमर है। इस बीमारी को चिकित्सकीय भाषा में नैसोफेरियांगल एंजियोफाइब्रोमा करते हैं। मरीज के पास आयुष्मान योजना का कार्ड था। इसलिए ऑपरेशन के लिए आयुष्मान योजना की कार्रवाई पूरी की गई और 26 अप्रैल को ऑपरेशन से ट्यूमर को निकाल दिया गया। करीब 12 ग्राम के इस ट्यूमर को निकालने में 1200 एमएल खून निकला। इसकी रिकवरी के लिए मरीज को दो यूनिट ब्लड चढ़ाया गया।
विज्ञापन

3 of 7
डॉ एचपी सिंह - फोटो : amar ujala
जरा सी चूक से प्रभावित हो सकती हैं दिमाग की नसें
डॉ. एचपी सिंह ने बताया कि यह ट्यूमर नाक के पिछले हिस्से में होता है। दिमाग की नसें भी सटी हुई होती हैं। अंतिम हिस्से में नाक, कान और आंख की नसों आपस में सटी होती हैं। दिमाग की नसें भी वहीं जुड़ती हैं। ऐसे में सिर के आंतरिक हिस्से का यह सबसे खास स्थान होता है। यहां जरा सी चूक होने पर कोई न कोई नस प्रभावित होने का डर रहता है। ऐसी स्थिति में एनेस्थीसिया देना बड़ी चुनौती होती है। आमतौर पर इसे लोकल एनेस्थीसिया के जरिये भी बेहोशी दी जाती है। इस मर्ज के समय से पकड़ में न आने पर ट्यूमर बढ़ जाता है। वह मस्तिष्क की नसों को दबा देता है। इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।

4 of 7
डेमो
जरा सी चूक से प्रभावित हो सकती हैं दिमाग की नसें
डॉ. एचपी सिंह ने बताया कि यह ट्यूमर नाक के पिछले हिस्से में होता है। दिमाग की नसें भी सटी हुई होती हैं। अंतिम हिस्से में नाक, कान और आंख की नसों आपस में सटी होती हैं। दिमाग की नसें भी वहीं जुड़ती हैं। ऐसे में सिर के आंतरिक हिस्से का यह सबसे खास स्थान होता है। यहां जरा सी चूक होने पर कोई न कोई नस प्रभावित होने का डर रहता है। ऐसी स्थिति में एनेस्थीसिया देना बड़ी चुनौती होती है। आमतौर पर इसे लोकल एनेस्थीसिया के जरिये भी बेहोशी दी जाती है। इस मर्ज के समय से पकड़ में न आने पर ट्यूमर बढ़ जाता है। वह मस्तिष्क की नसों को दबा देता है। इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।
विज्ञापन

5 of 7
डेमो
बालकों में पाई जाती है यह बीमारी
इस बीमारी को होने के कारणों पर शोध चल रहा है। यह बालकों में ही पाया जाता है। बालिकाओं में यह बीमारी नहीं के बराबर पाई जाती है। इस वजह से माना जाता है कि इसके पीछे बड़ी वजह हार्मोन्स का प्रभाव है। यह समस्या आठ से 15 साल के बीच होती है। यानी किशोरावस्था में कई तरह से हार्मोनल बदलाव होते हैं। माना जा रहा है कि यह समस्या भी इसी से जुड़ी हुई है।
विज्ञापन

6 of 7
डेमो
यूपी में सिर्फ केजीएमयू में इलाज
प्रदेश में अब तक सिर्फ केजीएमयू में इस बीमारी का इलाज किया जा रहा है। ओपीडी में रोजाना दो से चार केस आते हैं। शुरुआती दौर पर मरीज के आ जाने से दवाएं दी जाती हैं। इसके बाद भी ट्यूमर बढ़ता रहता है तो ऑपरेशन किया जाता है। ट्यूमर के बढ़ जाने से आंखों की रोशनी जाने और सुनाई कम पड़ने के साथ ही मस्तिष्क संबंधी विकार आने लगते हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
डेमो
इस टीम ने की सर्जरी : ऑपरेशन करने वाली टीम में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एचपी सिंह के साथ सहयोगी के तौर पर डॉ. अक्षय, डॉ. प्रियंका, डॉ. शैलेंद्र. डॉ. प्रीतम और एनेस्थीसिया से डॉ. हेमलता के साथ डॉ. अभिषेक और डॉ. विजय ने सहयोग किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें