फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खास है भंवरेश्वर महादेव मंदिर की कहानी, इस बात पर औरगंजेब को मांगनी पड़ी थी माफी

Thu, 02 Aug 2018 05:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 5
महादेव - फोटो : amar ujala
प्राचीन शिवालयों में शुमार भंवरेश्वर महादेव की महिमा निराली है। भक्त बताते हैं कि यहां का शिवलिंग द्वापर युग का है। महाबली भीम ने इसकी स्थापना की थी। जब पांडवों को वनवास हुआ था तब इसका नाम भीमाशंकर था।
विज्ञापन

2 of 5
- फोटो : amarujala
कहते हैं कुर्री सुदौली स्टेट की गायें यहां त्रयंबक नामक वन में चरने आती थी। लौटने पर सभी गाये महल की गौशाला में दूध देती, लेकिन एक गाय दूध ही नहीं देती थी। जब यह बात महल में फैली तो इसकी पड़ताल की गई। तब पता चला कि वन में एक स्थान घनी झाड़ियों से घिरा था, वहीं रोज वह गाय अपना दूध चढ़ा आती थी। जब उस स्थान की सफाई की गई तो मूर्ति दिखाई दी।
विज्ञापन

3 of 5
शिव मंदिर - फोटो : amarujala
तब उसी स्थान पर चबूतरा बनवाकर एक झंडा गाढ़ दिया गया और तब इसका नाम पड़ा सिद्धेश्वर। बाद में मुगल शासक औरंगजेब इधर से सेना लेकर गुजर रहा था तो हठ वश  उसने शिवलिंग की खुदाई शुरू कर दी। उसने जितना खोदवाया उतना ही विशाल शिवलिंग मिलता गया। 

4 of 5
- फोटो : amar ujala
आखिरकार जब अंत नहीं मिला तो सैनिकों से शिवलिंग की तुड़ाई शुरू करवानी चाही, लेकिन भंवरों ने सैनिकों पर हमला कर दिया। यह देख औरंगजेब ने क्षमा मांगी और एक गुम्बदनुमा छोटी सी मठिया बनवाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
शिव मंदिर - फोटो : amarujala
तब इसका नाम भंवरेश्वर पड़ा। बाद में मंदिर का जीर्णोद्धार कुर्री सुदौली स्टेट ने कराया। मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी गोस्वामी परिवार के पास है। सावन मास में लाखों श्रद्धालु यहां जुटते हैं। मनौती मांगते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें