मेजर विवेक गुप्ता, 2 राजपूताना राइफल्स
- फोटो : amar ujala
पत्र में पिता को लिखा था, आपको मुझ पर फक्र होगा’
- मेजर विवेक गुप्ता, 2 राजपूताना राइफल्स
कारगिल युद्ध में पराक्रम का परिचय देने वाले मेजर विवेक गुप्ता को महावीर चक्र प्रदान किया गया। सेकेंड राजपूताना राइफल्स के मेजर विवेक गुप्ता और उनके छह साथियों ने तुलोलिंग में असाधारण शौर्य का परिचय दिया। उनके परिचित बताते हैं कि अंतिम बार वह मई में घर आए थे। उनकी यूनिट वादियों में ही तैनात थी। जैसे ही युद्ध की सूचना मिली, विवेक तत्काल लौटे और यूनिट को लेकर कूच कर गए। दो मुश्किल चोटियां जीतने के बाद वह जून को शहीद हो गए। आठ जून को मेजर गुप्ता ने पिता को पत्र में लिखा था ‘आपको मुझ पर फख्र होगा।’ हालांकि, यह पत्र उनके पिता को 17 जून को मिला, जब आर्मी शहीद को सलामी दे रही थी। मेजर गुप्ता ने नेशनल डिफेंस एकेडमी से ग्रेजुएशन किया। यहां से निकलने के बाद उन्होंने एक बार पिता से कहा कि वह सेना में मोजे व ट्राउजर गिनने के लिए नहीं हैं। यह बात उन्होंने तब कही, जब उन्हें सुरक्षित पोस्टिंग दिलाने की चर्चा हो रही थी।
मातृभूमि की रक्षा के लिए बीमार पत्नी को छोड़ चले गए
- लांसनायक केवलानंद द्विवेदी, कुमाऊं रेजीमेंट
शहीद लांसनायक केवलानंद द्विवेदी बीमार पत्नी को छोड़ युद्धभूमि में चले गए थे। पत्नी ने उनसे कहा था कि मातृभूमि को आपकी ज्यादा जरूरत है, पर उन्हें क्या पता था कि लांसनायक खुद नहीं लौटेंगे। केवलानंद द्विवेदी का जन्म 12 जून 1968 को पिथौरागढ़ में हुआ। पिता ब्रह्मदत्त द्विवेदी सेना में सूबेदार थे। लांसनायक कारगिल सेक्टर में दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए बढ़ रहे थे कि ऊंचाई पर बैठे पाकिस्तानियों की एक गोली उनके सीने में धंस गई। हालांकि, उनके कदम रुके नहीं। अंतिम सांस तक केवलानंद ने दुश्मनों का सामना किया और शहीद हो गए। छह जून, 1999 को उनकी शहादत की खबर परिवार को मिली। इस सदमे से उनकी मां चल बसीं। 1990 में जब केवलानंद द्विवेदी की शादी हुई, तब वे 22 और उनकी पत्नी कमला द्विवेदी 20 साल की थीं। सरहद की सुरक्षा में बेहद व्यस्त रहने वाले केवलानंद को छुट्टियां भी बहुत कम मिलती थीं। शादी के बाद वह केवल चार बार ही घर आए थे।