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तस्वीरें: डॉ. कल्बे सादिक के अटल और हिंदू नेताओं से थे पारिवारिक रिश्ते, मुसलमानों की खिंचाई में पीछे नहीं

Wed, 25 Nov 2020 08:35 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक का मंगलवार की रात को इंतकाल हो गया। शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक का दुनिया से रुखसत होना। उनकी मृत्यु बस एक इंसान का इंतकाल भर नहीं है बल्कि कई उन परंपराओं पर भी संकट छा जाना है जिनके वह बड़े पैरोकार थे। कारण, कोई दूसरा कल्बे सादिक लखनऊ में पैदा होना काफी मुश्किल जो दिखाई दे रहा है। 
 
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
देश-विदेश में हिंदुत्व के मुद्दे पर धर्मनिरपेक्षवादियों के निशाने पर रहने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन और भाजपा के बड़े नेताओं से दोस्ताना रिश्ते होने के बावजूद उनके ऊपर कभी किसी ने सवाल उठाने का साहस नहीं किया। ऐसा था उनका कद। मौलाना सादिक से ही नहीं उनके बड़े भाई शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे आबिद से भी अटल बिहारी वाजपेयी नजदीकियां लखनऊ के अतीत के पन्ने में दर्ज हैं। 
 
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मौलाना कल्बे आबिद की दुर्घटना में दुखद मौत के बाद अटल उनके घर भी आए थे। उस समय अटल के साथ मौजूद भाजपा नेता अमित पुरी बताते हैं कि मौलाना कल्बे आबिद की मौत की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई उसके थोड़ी देर बाद ही मेरे घर पर फोन आ गया। अटल जी ने कहा, लखनऊ आ रहा हूं।

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने की शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक से मुलाकात (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मौलाना साहब के घर चलना है। इसके बाद अटल आए और हम लोग आबिद साहब के यहां गए। साथ ही बताया कि लखनऊ के नेताओं की बात करें तो स्व. लालजी टंडन की मौलाना से काफी निकटता थी। मौजूदा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के भी मौलाना के परिवार से करीबी रिश्ते रहे। 
 
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
संघ के पूर्व प्रमुख सुदर्शन के साथ की अपील
भाजपा ही नहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों के लिए भी उनके दरवाजे खुले दिखे। बात शायद 2008 की है। केसी सुदर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक थे। लखनऊ में संघ का बड़ा कार्यक्रम था। सुदर्शन भी लखनऊ आए थे। सुबह वह हमीदुल हसन से मिले और फिर पहुंच गए मौलाना कल्बे सादिक के यहां। जिसने देखा वह चौंक पड़ा। सादिक ने सुदर्शन का हाथ थामा और अंदर ले गए। बाहर आए तो मीडिया वालों ने संघ से रिश्तों पर सवाल किया।
 
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
इस पर सादिक ने कहा कि दोस्त का दूसरे दोस्त के यहां आना सवालों के दायरे में नहीं आता। दूसरा वाक्या वर्ष 2011 का है। सुदर्शन एक दिन सुबह-सुबह फिर मौलाना के यहां पहुंच गए। जिसने सुना वह भागा। चुनाव का मौका था। दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़े बाहर आए बोले और लिखित अपील जारी की कि राजनीति में ईमानदार और साफ.-सुथरी छवि के लोगों को चुनने की जरूरत है। मजहब के आधार पर वोट न दें।
 
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक - फोटो : अमर उजाला
मुसलमानों की खिंचाई में पीछे नहीं
मौलाना मुसलमानों की खिंचाई करने में पीछे नहीं थे। उन्होंने बाराबंकी में मुस्लिम समाज के कार्यक्रम में कहा था कि मुसलमानों से पूछिए कि दीन अर्थात धर्म क्या है? तो वह कहेंगे कि नमाज पढ़ना, रोजे रखना और हज करना। ये सब धार्मिक प्रथाएं हैं, दीन नहीं है। दीन तो वह गुण है जो धार्मिक संस्कार को अदा करने के बाद आता है। मुसलमानों को रिश्वत नहीं लेनी चाहिए। लोगों को दुखी नहीं करना चाहिए। जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।
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