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संवेदनशील युवाओं से बदलेगी जरूरतमंदों की तकदीर, छोटे-छोटे प्रयास से ही बड़े बदलाव संभव

Fri, 16 Oct 2020 04:30 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अमित कुशवाहा, संगीता आनंद, क्रिस जोन - फोटो : अमर उजाला
पत्थरों मदद करो, कुछ आम तोड़ने हैं... कि बच्चों खुशियां पेड़ों पर लटकी हैं। महामारी के इस दौर में नि:स्वार्थ सेवा को आगे आ रहे युवाओं के संकल्प भी इन पंक्तियों में छिपे भाव की तरह अडिग हैं। लोग घर में रहें, सुरक्षित रहें, संक्रमण से बचें और उन्हें भूखे पेट न सोना पड़े। इन छोटी-छोटी चीजों का ख्याल रख युवाओं ने हर मदद जरूरतमंदों तक पहुंचाई है। यह निष्कर्ष था अमर उजाला व यूनिसेफ की ओर से गुरुवार को आयोजित वेबिनार का, जिसका अमर उजाला के फेसबुक पेज पर लाइव प्रसारण भी किया गया। अमर उजाला व यूनिसेफ की ओर से युवाओं के लिए वेबिनार की श्रृंखला जिंदगी मास्टर क्लास सीजन-2 का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार को ‘मैं हूं कोरोना योद्धा’ थीम पर आयोजित वेबिनार का संचालन यूनिसेफ की संगीता आनंद ने किया।
 
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अंशुमालि शर्मा - फोटो : अमर उजाला
शेयरिंग इज केयरिंग का भाव खत्म न होने पाए
वेबिनार के पैनलिस्ट एनएसएस के विशेष कार्याधिकारी व राज्य संपर्क अधिकारी अंशुमालि शर्मा ने कहा कि हालात चाहे सामान्य हों या महामारी के, सामुदायिक सेवा में युवाओं की भागीदारी से क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। शेयरिंग इज केयरिंग के भाव को अभी खत्म नहीं होने देना है।
 
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संगीता आनंद - फोटो : अमर उजाला
वीडियो प्रतियोगिता में हिस्सा लें, जीतें पुरस्कार
संगीता आनंद ने बताया कि कोरोना काल में सामने आई समस्या, उसे हल करने के लिए अपनाई गई रणनीति और उसका असर क्या पड़ा, यदि आपके पास भी है कोई रोचक कहानी तो एक मिनट से कम का वीडियो बनाकर भेजें। इसमें आपको अपनी कहानी अपनी जुबानी बतानी है। नीचे दी गई मेल आईडी पर वीडियो 25 अक्तूबर की शाम 6 बजे तक अवश्य मिल जाना चाहिए। यह कोरोना वारियर थीम पर प्रतियोगिता है, जिसमें हिस्सा लेकर पुरस्कार जीता जा सकता है।
 

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अजीत कुशवाहा - फोटो : अमर उजाला
हर बाधा रास्ता देती हैं
दूसरे पैनलिस्ट राष्ट्रीय युवा पुरस्कार व राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार विजेता अजीत कुशवाहा ने कहा कि महामारी में हमारी परीक्षा थी। जब हम मदद को आगे बढ़े, सैकड़ों लोग साथ आए। यही सीखा कि बाधाएं रास्ता देती हैं।
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क्रिस जोन - फोटो : अमर उजाला
छोटे-छोटे प्रयास से बड़े बदलाव
एक अन्य पैनेलिस्ट राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार विजेता क्रिस जोन ने कहा कि प्रयास छोटे हों या बड़े, किसी न किसी के काम आते हैं। महामारी में किसी ने एक दिन खाना दिया, तो किसी ने महीने भर तक का राशन पहुंचाया। किसी ने बच्चों को फल और बिस्किट बांटे तो किसी ने जरूरतमंदों को मास्क का वितरण किया। ये भाव अभी लंबे समय तक जारी रखने की जरूरत है।
 
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