फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिडलैंड मैनेजर की मौतः नया खुलासा, ओह... तो घटना वाली रात घर पर नहीं था विश्वजीत

Thu, 22 Aug 2019 04:37 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
लखनऊ में गोमतीनगर के विश्वासखंड तीन निवासी मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर 30 वर्षीय विश्वजीत सिंह पुंडीर की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। स्टेट मेडिको लीगल के संयुक्त निदेशक डॉ. जी खान ने जांच के बाद राय दी है कि घटना वाली रात विश्वजीत अपने घर में प्रवेश के लिए बाउंड्रीवॉल फांद रहा था तभी ग्रिल का नुकीले सरिये उसके बायें हाथ के निचले हिस्से में घुस गया। इसी सरिये से विश्वजीत का हार्ट पंक्चर हो गया और अत्यधिक रक्तस्त्राव से मौत हो गई। गोमतीनगर थाने के इंस्पेक्टर राम सूरत सोनकर ने बताया कि डॉ. जी खान ने बीते दिनों अपनी रिपोर्ट पुलिस को सौंपी दी है। रिपोर्ट से साफ है कि विश्वजीत की हत्या नहीं की गई बल्कि वह हादसे का शिकार हुआ था। मालूम हो कि अमर उजाला की पड़ताल में भी हादसे की बात ही सामने आई थी।

विज्ञापन

2 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
डॉ. खान ने आशंका जताई है कि घटना के वक्त विश्वजीत अपने घर से बाहर था। उनके मुताबिक आधी रात को वह घर लौटा और भीतर घुसने के लिए बाउंड्रीवॉल फांदने लगा। इस दौरान बाउंड्रीवॉल के ऊपरी हिस्से में लगी लोहे की ग्रिल के नुकीले सरिए उसके बायें हाथ के नीचे घुस गए। उसके शरीर में दो सरिये घुसने के घाव भी हैं। एक सरिया सीधे उसके हार्ट की तरफ गया, जिससे उसका हार्ट पंक्चर हो गया। पहले विश्वजीत के अपने कमरे की बालकनी से गिरकर चोटिल होने की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि, डॉ. खान ने इससे इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि विश्वजीत के शरीर का वजन 75 किलोग्राम से अधिक था। उसकी बालकनी के ठीक नीचे बाउंड्रीवॉल थी, जिसके आसपास पेड़ लगे थे। मौके पर एक पेड़ टूटा पाया गया था।
विज्ञापन

3 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
डॉ. खान का कहना है कि अगर वह बालकनी से नीचे गिरता तो पेड़ से टकराने के बावजूद ग्रिल के सरिये उसके शरीर को काफी नुकसान पहुंचाते। सरिया शरीर के आरपार भी हो सकते थे। उन्होंने तर्क दिया कि विश्वजीत अगर ऊपर से नीचे गिरता तो उसके हाथों में भी चोटें आतीं। डॉ. खान का कहना है कि किसी घटना-दुर्घटना अथवा हमले के वक्त हमारे हाथ डिफेंस का काम करते हैं। अगर विश्वजीत ऊपर से नीचे गिरता तो सबसे पहले वह अपने हाथ से खुद को बचाने का प्रयास करता, लेकिन उसके हाथों में कहीं भी चोट नहीं आई है। इससे साफ है कि वह बाउंड्रीवॉल फांदते वक्त नशे में होने की वजह से ग्रिल के सरियों पर फंसा और चोटिल हो गया।

4 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
अत्यधिक नशे में होने के कारण महसूस नहीं हुआ दर्द
जिस वक्त विश्वजीत को चोट लगी, वह अत्यधिक नशे की हालत में था। डॉ. खान का मानना है कि इसी वजह से वह चोट के दर्द को महसूस नहीं कर सका। विश्वजीत के कमरे से भी पुलिस को बीयर के कई खाली कैन और नशे की अन्य सामग्री मिली है जिससे उसके नशा करने की पुष्टि हो रही है।
विज्ञापन

5 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
विश्वजीत के शरीर पर लगी चोट ग्रिल की ही है
फोरेंसिक एक्सपर्ट ने विश्वजीत के शरीर पर लगे दो गहरे घाव और ग्रिल के सरियों के बीच की दूरी का नाप लिया था। दोनों में ही दस सेंटीमीटर का अंतर था। इससे विश्वजीत पर किसी नुकीली वस्तु से हमला करने की आशंका समाप्त हो गई थी। यह स्पष्ट हो गया था कि विश्वजीत के शरीर पर लगी चोट ग्रिल के सरिए की ही है। फोरेंसिक विशेषज्ञों की यह राय पुलिस की विवेचना में महत्वपूर्ण साबित होगी।
विज्ञापन

6 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
आंतरिक रक्तस्राव की वजह से ग्रिल के पास नहीं गिरा ज्यादा खून
फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रिल फांदते वक्त लगी चोट से विश्वजीत के आंतरिक रक्तस्राव शुरू हो गया था। इसी वजह से ग्रिल के आसपास खून की कुछ बूंदें ही मिली थी। ग्रिल पार करने के बाद विश्वजीत गैलरी से सीढ़ियों पर चढ़ा और अपने कमरे में पहुंचा। तब तक उसके भीतरी हिस्से में भर चुका खून बाहर निकलने लगा। फोरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि खून देखकर उसने सफाई करने की कोशिश की। ब्लीडिंग बंद नहीं हुई तो वह नंगे पैर अपनी मां के कमरे में पहुंचा और उन्हें चोट लगने की जानकारी दी। जांच में खून से सने पैरों के निशान विश्वजीत के ही पाए गए हैं।
विज्ञापन

7 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
पेट की एक घाव की एक्सपर्ट जांच की जताई जरूरत
डॉ. जी खान ने विश्वजीत के पेट में लगे एक घाव की उच्च वैज्ञानिक जांच की आवश्यकता जताई है। उनके मुताबिक विश्वजीत का घर के बाहर या सड़क पर किसी से झगड़ा हुआ अथवा उस पर हमला किया गया था। विश्वजीत को परिवारीजन मिडलैंड अस्पताल ले गए थे। वहां की बेड हेड टिकट (बीएचटी) में भी हमले का जिक्र किया गया है। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि विश्वजीत के पेट में एक घाव (इनसाइज्ड वुंड) है। ऐसा घाव किसी चाकू, कांच या रेजर जैसी वस्तु से हो सकता है। हालांकि, इस घाव से मौत नहीं हुई। डॉ. जी खान ने उक्त घाव के बारे में पता लगाने के लिए लाई डिटेक्शन, नारको व ब्रेन मैपिंग से जांच कराने का सुझाव दिया है।

8 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
कमरे में नहीं मिले थे संघर्ष के निशान
पुलिस के मुताबिक, विश्वजीत के कमरे में संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले थे। परिवारीजन उसकी घर में ही हत्या किए जाने की बात कह रहे हैं पर हत्या की वजह और हत्या किसने की? इस पर कुछ प्रकाश नहीं डाल पा रहे हैं। अगर विश्वजीत की हत्या की गई होती तो उसके कमरे का सामान अस्त-व्यस्त होता। उसका शरीर काफी तगड़ा था इसलिए खुद को बचाने के लिए वह भी हत्यारों से जूझ जाता। आपसी संघर्ष में कमरे का सामान टूट-फूट जाता। फर्नीचर बिखर जाता। विश्वजीत के कपड़े फट जाते। काफी चीख-पुकार भी मचती। विश्वजीत या हत्यारों के टूटे हुए बाल मौके पर बिखरे मिलते। हालांकि, ऐसा कोई भी साक्ष्य या निशान कमरे में नहीं मिला जिससे हत्या की बात पुष्ट नहीं हो पा रही है।

9 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
ब्लड-यूरीन सैंपल न रखने से नशे की जांच में फंसा पेंच
मेडिको लीगल एक्सपर्ट ने अपनी रिपोर्ट में विश्वजीत के अत्यधिक नशे में होने की बात कही है, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस के स्टाफ की लापरवाही से इस बिंदु पर पेंच फंस गया है। पोस्टमार्टम करने वालों ने विश्वजीत के ब्लड और यूरीन का सैंपल ही सुरक्षित नहीं रखा है। सिर्फ यही एक ऐसे सैंपल थे, जिससे फोरेंसिक विशेषज्ञों को विश्वजीत के नशे में होने और नशे की तीव्रता के बारे में जानकारी मिलती। यह जानकारी पुलिस की विवेचना में काफी अहम साबित हो सकती थी।

 

10 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
...तो घटना वाली रात घर पर नहीं था विश्वजीत
फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की माने तो घटना वाली रात विश्वजीत अपने घर पर था ही नहीं। वह बाहर था जबकि घटना के बाद परिवारीजनों ने उसके रात करीब 11 बजे ही घर आने की जानकारी दी थी। परिवारीजनों ने यह भी कहा था कि विश्वजीत अक्सर देर रात घर आता था, इसलिए उसके पास मकान के गेट की एक चाबी रहती थी। सवाल यह है कि अगर विश्वजीत के पास चाबी थी तो वह गेट क्यों फांद रहा था? पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट यह आशंका जता रहे हैं कि वह कुछ दोस्तों के साथ घर आया होगा। सबने मिलकर नशा किया और उसके बाद गुपचुप घर से बाहर चले गए। जाते वक्त विश्वजीत चाबी भूल गया जिसकी वजह से उसे बाउंड्रीवॉल फांदने को मजबूर होना पड़ा। कुछ पुलिसकर्मियों ने भी आधी रात को उसे पॉलीटेक्निक चौराहे के आसपास देखे जाने की बात भी कही है। यह दीगर है कि इसकी कोई सीसीटीवी फुटेज या प्रत्यक्षदर्शी अब तक ढूंढे नहीं जा सके हैं।
 
विज्ञापन

11 of 11
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत - फोटो : amar ujala
जानिए क्या था मामला
महानगर स्थित मिडलैंड अस्पताल का मैनेजर विश्वजीत सिंह पुंडीर 16 जुलाई की रात गोमतीनगर के विश्वासखंड-3 स्थित घर में संदिग्ध हालात में घायल मिला था। उसके दायें हाथ के नीचे के हिस्से में करीब 10 सेंटीमीटर की दूरी पर दो गहरे गोल घाव मिले थे। पहली नजर में घाव गोलियों के लग रहे थे। परिवारीजन उसे मिडलैंड अस्पताल ले गए, जहां ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई। पुलिस विश्वजीत की मौत को हादसा मान रही थी। हालांकि, भाई इंद्रजीत ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। इंद्रजीत का कहना था कि उसका भाई 16 जुलाई की शाम करीब साढ़े छह बजे अस्पताल से घर पहुंचा था। एक घंटे बाद वह बाहर चला गया। रात करीब 11 बजे वह फिर घर आया। करीब डेढ़ बजे वह दूसरी मंजिल पर स्थित कमरे से खून से लथपथ हालत में पहली मंजिल पर मां के कमरे में पहुंचा। मां ने दरवाजा खोला तो विश्वजीत लहूलुहान था। विश्वजीत ने मां के हाथ जोड़कर माफी मांगी और गुहार लगाई। उसे मिडलैंड अस्पताल ले जाया गया, जहां मौत हो गई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें