योग किसी केलिए वजन कम करने का जरिया है, तो किसी के लिए साधना है। किसी के लिए जुनून है तो किसी के लिए समाज को स्वस्थ रखने की तकनीक। पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने की तैयारियां चल रही हैं। लखनऊ भी योग दिवस मनाने को तैयार है। हर गली, हर पार्क में योगाभ्यास चल रहे हैं।
रोजाना नए लोग इससे जुड़ रहे हैं और श्रंखला लंबी होती जा रही है। इनमें से कुछ ऐसे हैं जो नए-नए योग से जुड़े हैं, पर कुछ के लिए तो योग उनकी जिंदगी का एक हिस्सा है। आइए आज जानते हैं ऐसे ही लोगों के बारे में जिनके लिए जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है योग...।
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योग दिवस
- फोटो : amar ujala
योग एक ऐसी तकनीक है, जो हमारे शरीर, मन और आत्मा को एक करती है। यह हमारे अंदर से तनाव और कुंठा को दूर करती है। जब हम सामान्य श्वांस की तकनीकों, ध्यान, प्राणायाम और कसरत करते हैं तो यह सब हमारे शरीर व मन को अंदर से खुश और अच्छा रखने के लिए प्रेरित करते हैं।
योग से मिलती आध्यात्मिक ऊर्जा
15 साल से नियमित योग साधना कर रही हूं। जिम कभी नहीं गई। स्वामी रामदेव जी की प्रेरणा ने योग से जुड़ने केलिए प्रेरित किया। गर्व महसूस होता है कि जब पूरा विश्व 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाता है। जहां तक सवाल यह है कि योग क्या है हमारे लिए? तो मैं कहूंगी कि किसी के लिए योग वजन घटाने का जरिया हो सकता है, लेकिन मेरे लिए साधना है योग। ग्रुप में योग करने से एक -दूसरे को देखकर प्रेरणा मिलती है। यह बात अलग है कि मैं काम की व्यस्तता के बीच लोगों को जॉइन नहीं कर पाती हूं और अकेले ही करती हूं। योग करके, इससे जुड़कर देखिए, यह आपको सकारात्मक सौंदर्य से भर देगा। मुझे जब भी मौका मिलता है, हरिद्वार कैंप में हिस्सा लेने चली जाती हूं। रेनू प्रकाश, नेचर लवर एंड बोनसाई आर्टिस्ट
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प्रभा सिंह, योगा इंस्ट्रक्टर
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तीन गंभीर बीमारियों से मिली निजात
योग मेरे लिए एक दवा है, जिसने लिवर सिरोसिस, पैरालिसिस और कैंसर जैसी बीमारियों से मुझे बचाया। यूं तो योग करने की आदत युवावस्था से ही है, लेकिन बीमारी से छुटकारा मिलना यानी मेरा नया जन्म था। उसके बाद मैंने तय कर लिया कि योग का प्रचार-प्रसार करना है। स्वामी चिन्मयानंद जी से मैंने योग साधना सीखी और फिर इंस्ट्रक्टर बन गई। पिछले 35 साल से योग करती आ रही हूं। पहले बच्चे छोटे थे तो उतना समय नहीं दे पाती थी। दरअसल मेरी बीमारी को ठीक करने में जितना योगदान दवाओं का है, उतना ही योग का भी है। इसे यदि कुशल प्रशिक्षक के नेतृत्व में किया जाए तो असाध्य बीमारी भी ठीक हो सकती है। मेरा मानना है कि योग के लिए एक दिन का इंतजार क्यों, आप भी आज से ही शुरू कर दीजिए। प्रभा सिंह, योगा इंस्ट्रक्टर
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मुकेश सिंह, दूरदर्शनकर्मी
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100 किलो का था, 25 किलो कम किया वजन
जनेश्वर मिश्र पार्क में सुबह पांच बजे पहुंच जाता हूं। आधा घंटे के भीतर 20-25 लोग जुट जाते हैं और शुरू हो जाती है क्लास। दरअसल मेरा वजन 100 किलो हो गया था। पहले मैंने टहलना शुरू किया था। वहां हमारे उत्तराखंड वाले गुरुजी मिले और उनसे मैंने योग सीखना शुरू किया। देखते ही देखते मेरा वजन 25 किलो तक कम हो गया। यह मेरे लिए जादू से कम नहीं था। बस उसी समय प्रण कर लिया कि अब लोगों को योग करने के लिए प्रेरित करना है। कोशिश रंग लाई और धीरे-धीरे लोग योग के लिए आने लगे। कोई भी दिन ऐसा नहीं जब सुबह योग क्लास न चलती हो। मुकेश सिंह, दूरदर्शनकर्मी
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विकास भारद्वाज, योग प्रशिक्षक
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जिम कल्चर को न कहने लगे हैं लोग
हिमाचल प्रदेश का रहने वाला हूं। नौकरी की तलाश लखनऊ ले आई। यौगिक साइंस की पढ़ाई की थी। यहां आने केबाद डिप्लोमा पूरा किया। धीरे-धीरे योग से जुड़ाव बढ़ता गया, लोग जुड़ते गए। पहले जहां सिर्फ दो ही लोग आते थे, अब यह संख्या 7-8 हो चुकी है। दरअसल पहले जागरूकता की कमी थी। जब से हम विश्व योग दिवस मनाने लगे, तब से लोग जिम कल्चर को छोड़ योग की तरफ आने लगे हैं। आज तमाम ऐसी बीमारियां हैं, जिसमें योग से राहत मिल रही है। लोगों को त्वरित फायदा हो रहा है और यही वजह है कि लोग इसे अपना रहे हैं। विकास भारद्वाज, योग प्रशिक्षक
दिनभर की भागदौड़ के लिए मिलती है ताकत
बड़ी तमन्ना थी मेरी लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ने की। शादी के बाद लखनऊ आकर बस गई। मौका मिला और लखनऊ विश्वविद्यालय से डिप्लोमा कर लिया। हालांकि योग तो हमेशा से करती आ रही थी, लेकिन कोर्स करने केबाद जिम्मेदारी बढ़ गई और योग में पहले खुद को नियमित किया। धीरे-धीरे लोगों के बीच जाने लगी, कभी पार्क तो कभी कैंप में हिस्सा लेकर लोगों को योग से जोड़ने की कोशिश की। मेरा मानना है कि योग आपको दिन भर की भागदौड़ केबीच एकाग्र होेने, मन व दिमाग को शांत रखने की प्रेरणा देता है। पिछले 14 साल से लगातार योग कर रही हूं। कभी घर के सामने पार्क में तो कभी टैरेस पर लगती है मेरी योगा क्लास। ओम सिंह, मनोवैज्ञानिक