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ट्रेन दुर्घटना: आंखों में तैर गया खौफ का मंजर, भूले न भुलाएगा हादसा

Tue, 22 Nov 2016 02:24 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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इंदौर पटना एक्सप्रेस(19321) की बोगियां पटरी से ऐसी उतरीं कि कई घरों के चिराग बुझ गए तो कईयों ने ऐसा दर्दनाक व भयानक मंजर देखा, जो उन्हें भूले न भुलाएगा। पिचकी हुईं बोगियां, कराहते और मौत से जूझते लोग। रविवार को जब स्पेशल ट्रेन से यात्री चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचे तो दर्द और खौफ का ऐसा मंजर बयां किया कि रोंगटे खड़े हो गए।
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आपबीती सुनाते-सुनाते एक ओर जहां यात्री भावुक हो गए, वहीं रेलवे व जिला प्रशासन की बेरुखी पर नाराजगी भी जताई। यात्रियों ने कहा कि ढाई से तीन घंटे तक मदद को कोई नहीं आया, अगर स्थानीय लोग न सामने न आते तो हादसे की शक्ल ही कुछ और होती।
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पुखरायां से ट्रेन की डैमेज बोगियों को हटाकर स्पेशल ट्रेन से बाकी बोगियां को चारबाग रेलवे स्टेशन लाया गया, जहां चार बोगियां लगाकर ट्रेन को राजेंद्रनगर के लिए रवाना किया गया। इसमें थर्ड एसी की एक, स्लीपर की दो और लगेजयान की एक बोगी शामिल है।

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ऐन वक्त पर कोच बदलने से खाई चोट
आजमगढ़ निवासी अश्विनी सिंह ट्रेन की एस-3 बोगी में सफर कर रहे थे। पर, एस-1 में यात्रा कर रही एक महिला के कहने पर उन्होंने सीट बदल ली। अश्विनी ने बताया कि मुझे क्या पता था कि एस-1 बोगी हादसे का शिकार हो जाएगी। महिला को सीट देने के बाद एस-1 में सुकून से सफर कर रहा था कि अचानक एक झटका लगा और बोगी पिचक गई। सिर और पैर में गंभीर चोटें आईं, लेकिन ईश्वर की कृपा से जान बच गई। चोट लगने के बाद महिला ढूंढते हुए मेरे पास भी आई थी, उसकी आंखे नम थीं...।
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आंखों के सामने तैर गया मौत का मंजर
ट्रेन की ए-1 बोगी में भोपाल से पटना का सफर कर रहे प्रोफेसर एनके तिवारी व उनकी पत्नी पूनम तिवारी के चेहरे पर खौफ के मंजर की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। वह शादी अटेंड करने के लिए जा रहे थे। प्रोफेसर बोलते-बोलते रुक गए तो पूनम ने बात आगे बढ़ाई और कहा-ऊपर की बर्थ पर थी, झटका लगा और धड़ाम से नीचे। देखते ही देखते मौत आंखें के सामने तैर गई। जान तो बच गई, लेकिन बोगी से निकलने के बाद आधे घंटे तक दिमाग काम नहीं कर रहा था।
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ढाई घंटे तक करते रहे मदद का इंतजार
एस-4 बोगी में यात्रा कर रहे ध्रुव कुमार की जिंदगी हादसों का गुलदस्ता सा बन गई है। हाल ही में बेटे को खोया, फिर भतीजे और पत्नी को। एक बेटी बची है, जिससे मिलने के लिए इंदौर से पटना जा रहे ध्रुव कुमार की सांसे तब थम गईं, जब बोगी बेपटरी हो गई। ध्रुव कुमार ने कहा कि बेहतर होता कि मर जाता, लेकिन फिर आंखों में बेटी की तसवीर उभर आई। उसकी शादी है फरवरी में। हादसा करीब ढाई बजे हुआ, लेकिन अगले लोग कराहते-तड़पते रहे, पर रेलवे व जिला प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली।
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खेत में घुस गई बोगी, दरवाजा जाम
राहुल जायसवाल, केशवती, मोतीराम और प्रियंका जायसवाल एस-5 बोगी से फैजाबाद जा रहे थे एक शादी में शरीक होने के लिए। प्रियंका ने बताया कि हम सब सो रहे थे कि एक जबरदस्त झटके ने हमारी नींद उजाड़ दी। बोगी धड़धड़ाते हुए खेतों में जा घुसी, दरवाजे जाम हो गए। घबराहट के मारे दम घुटने सा लगा। हिम्मत बांधी और एक-दूसरे पर चढ़कर सीढ़ी बनाई। जिससे हम बाहर निकल सके। इसके बाद एम्बुलेंस के इंतजार में घंटों खेत में ही बैठे रहे।

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सामान के नीचे दब गई, घुटने लगा दम
ऊपर की बर्थ मिली। देर रात तक बातें चलती रहीं, करीब दो बजे आंख लग गई। एक घंटे बाद ऐसा झटका लगा कि ऊपर की बर्थ से सीधे नीचे गिर गई और कुछ सेकेंडों में मेरे ऊपर सारा सामान और दूसरे यात्री गिर पड़े। मैं दब गई और दम घुटने लगा। विंध्यवासिनी ने आपबीती सुनाई तो उनकी आंखें नम हो गईं। विंध्यवासिनी ने बताया कि बोगी पलट गई, रेलवे की मदद से पहले स्थानीय लोग मदद को आ गए और उन्होंने बाहर निकाला। बाहर एम्बुलेंस और स्ट्रेचर पर लदी लाशें देखती रही, घंटों बीत गए। लगा कि प्राण ही निकल गए हों...।

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रोशन की बहादुरी को सलाम, बचाई बच्ची की जान
रोशन नौवीं का छात्र है। मासूमियत से भरा हुआ। लेकिन जब इंदौर पटना एक्सप्रेस हादसे का शिकार हुई तो रोशन ने बहादुरी का परिचय दिया। पिता हरेंद्र के साथ रोशन इंदौर से पटना की यात्रा जनरल बोगी में कर रहा था। सुबह जब ट्रेन पटरी से उतरी तो बोगी पूरी तरह पलट गई। बोगी के एक यात्री उदय सिंह ने बताया कि रोशन ने सीट के नीचे फंसी एक बच्ची की जान बचाई। बाकी के लोग जब अपनी जान बचाने के लिए प्रयास कर रहे थे तो रोशन ने बच्ची को बर्थ के नीचे से उसे बाहर निकाला, इसके बाद खुद बाहर आया। रोशन ने इच्छा जाहिर की कि वह भारतीय सेना में शामिल होना चाहता है और इसकेलिए वह जीतोड़ मेहनत भी कर रहा है।
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एआरटी ने संभाला मोर्चा, उरे ने भेजी स्पेशल ट्रेन
इंदौर-पटना एक्सप्रेस के बेपटरी होने के बाद उत्तर रेलवे चारबाग रेलवे स्टेशन की ओर से तत्काल एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन(एआरटी) मौकेपर भेजी गई। एआरटी ने एक ओर जहां मोर्चा संभाला, वहीं उत्तर रेलवे प्रशासन ने भी यात्रियों को सकुशल लाने के लिए स्पेशल ट्रेन भेजी, जिससे यात्री चारबाग पहुंचे। जहां ट्रेन में स्लीपर, थर्ड एसी सहित चार बोगियां लगाई गईं और ट्रेन को आगे रवाना किया गया। इतना ही नहीं स्पेशल ट्रेन से चारबाग पहुंचे यात्रियों के लिए रेलवे प्रशासन की ओर से चाय, पानी, केले वगैरह का वितरण भी करवाया गया। स्टेशन पर सीनियर डीसीएम शिवेंद्र शुक्ल, स्टेशन प्रबंधक बीएस गिल सहित सुरक्षाबल मौजूद रहे।
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