रणजीत बच्चन हत्याकांड के खुलासे को पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने आठ टीमें लगाई थीं। इन्होंने 80 घंटे में वारदात का खुलासा कर दिया। आठ बिंदुओं पर शुरू हुई पड़ताल प्रेम त्रिकोण पर खत्म हुई। जांच के दौरान पुलिस टीमों ने 87 लोगों की कॉल डिटेल निकलवाई, जिसमें से 18 के नंबर डायवर्जन पर भी लिए। पुलिस ने वारदात स्थल से ओसीआर और कुछ होटलों के 72 सीसीटीवी कैमरे खंगाले। इनसे अहम सुराग मिले।
विज्ञापन
2 of 8
रणजीत बच्चन हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
आठ बिंदुओं पर की गई पड़ताल
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक टीम ने नौकरी के नाम पर रुपये का लेनदेन, पारिवारिक विवाद, जमीन से जुड़ा विवाद, रुपये के लेनदेन, पति-पत्नी के बीच संबंध, रणजीत के रिश्ते और कनेक्शन, आतंकी हमले जैसे बिंदुओं पर काम किया। आतंकी हमले की बात पहले ही दिन गलत निकली। जब दोनों पत्नियों के रिश्तों के बारे में जानकारी ली तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस ने इन पर छानबीन शुरू की तो हत्या का राज फाश हो गया।
विज्ञापन
3 of 8
ranjeet bachchan
- फोटो : amar ujala
25 को आखिरी बार हुई थी स्मृति-दीपेंद्र की बात
पुलिस के मुताबिक रणजीत से पहली पत्नी कालिंदी वर्ष 2002 से जुड़ी थी। वहीं, कोषागार मुख्यालय में क्लर्क स्मृति 12 साल बाद मिली। विकासनगर निवासी स्मृति का अक्तूबर में रायबरेली के दीपेंद्र से प्रेम संबंध हो गया। 17 जनवरी को स्मृति के अपमान के बाद रणजीत की हत्या की साजिश रची गई। स्मृति और दीपेंद्र की अंतिम बार 25 जनवरी को बातचीत हुई। पूछताछ में स्मृति ने पुलिस को बताया कि दीपेंद्र 26 जनवरी को मुंबई चला गया।
4 of 8
घटनास्थल पर पुलिसकर्मी मौजूद हैं और मामले की जांच जारी है।
- फोटो : amar ujala
वहां से उसने वीडियो कॉल कर कैंसर पीड़ित भाई को दिखाया था। हालांकि, उसकी कॉल डिटेल लखनऊ की लोकेशन दे रही थी। पुलिस ने स्मृति और दीपेंद्र की कुंडली खंगालनी शुरू की तो पता चला कि विकासनगर के होटल में दोनों अक्सर मिलते थे। 28-29 जनवरी को भी दोनों इसमें गए थे। इसकी पुष्टि के बाद पुलिस ने स्मृति पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। उधर, 25 जनवरी को दीपेंद्र व स्मृति ने मोबाइल व सोशल साइट से दोनों के नंबर व अकाउंट डिलीट कर दिए। सिर्फ वाट्सएप पर बात होने के बाद उसे भी डिलीट कर देते थे।
विज्ञापन
5 of 8
ranjeet bachchan murder case
- फोटो : अमर उजाला
स्मृति ने पुलिस को खूब छकाया
हत्याकांड के बाद से पुलिस ने रणजीत की दोनों पत्नियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। पुलिस ने फुटेज से मिली हत्यारों की फोटो कालिंदी को दिखाई तो उसने पहचानने से इंकार कर दिया। वहीं, स्मृति ने पहले इंकार किया, फिर गोरखपुर निवासी रणजीत के करीबी युवक का नाम बता दिया। इस पर पुलिस की एक टीम गोरखपुर का कनेक्शन खंगालने लगी। स्मृति ने पुलिस से दीपेंद्र के साथ बातचीत से भी इंकार किया।
विज्ञापन
6 of 8
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सिर्फ गुमराह करने को लूटा था मोबाइल
हत्या से पहले हमलावरों ने रणजीत व आदित्य का मोबाइल लूटा था। इससे पुलिस को लगे कि लुटेरों ने वारदात की है। हालांकि, इस कहानी से वारदात के चंद घंटों बाद ही पर्दा उठ गया। दोनों के मोबाइल लक्ष्मण मेला मैदान के पास पड़े मिले। फिर पुलिस ने मोबाइल के जरिये हत्यारों तक पहुंचने की कवायद शुरू की।
विज्ञापन
7 of 8
रणजीत बच्चन हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की सतर्कता से बचे निर्दोष
हत्याकांड के बाद पुलिस ने घर से वारदात स्थल तक के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकाली। इसमें रणजीत, कालिंदी व आदित्य साथ टहलने निकले दिखे। इसके बाद हजरतगंज चौराहे के पास से दीपेंद्र तीनों के साथ सिर पर मफलर बांधे मोबाइल पर बात करते हुए टहलने लगा। कुछ दूर बाद जितेंद्र भी साथ हो लिया। दोनों ऐसे चल रहे थे कि कालिंदी उन्हें पहचानती है। जब जनपथ मार्केट की तरफ कालिंदी मुड़ी तो दोनों को पलटकर देखा भी। एक फुटेज में कालिंदी की हरकत संदिग्ध भी लगी। वहीं, आदित्य पर हमला भी काफी नजदीक से किया, ताकि लोगों को लगे कि उसने ही हमला किया और खुद पर गोली चला दी। इसके बाद असलहा साथी को पकड़ा दिया। लेकिन जब पुलिस ने फुटेज खंगाली तो हकीकत सामने आ गई।
तय थी हत्या की जगह
हत्यारों ने साजिश रचने के साथ हत्या की जगह तय कर दी थी। रेकी के दौरान ग्लोब पार्क तक कई सीसीटीवी कैमरे हमलावरों को नजर आए। इसके आगे रणजीत जाते नहीं थे। वहीं, से वापस नगर निगम दयानिधान पार्क जाना था। वारदात वाली जगह पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। ऐसे में इसे मुफीद जगह मानकर वारदात को अंजाम दिया।