बच्चों के जन्म से लेकर उनके बड़े होने तक बच्चों की देखभाल, बाहरी जिम्मेदारियों के बीच भागती-दौड़ती सुपरविमेन महिलाएं 50 तक पहुंचते-पहुंचते कई बार घुटने और आस्टियोपोरोसिस की समस्या से जूझने लगती हैं। इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी से आर्थराइटिस भी जल्दी उन्हें जकड़ में ले लेता है। फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबलिटेशन प्रो. एंड हेड डॉ. अनिल कुमार गुप्ता बता रहे हैं कि 40 पार महिलाओं को किन बातों को लेकर सतर्क रहना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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डॉ अनिल कुमार गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
वजन पर रखें नजर
ओवरवेट होना महिलाओं में आर्थराइटिस का सबसे बड़ा कारण है। दरअसल हमारे कुछ जोड़ कुछ सीमा तक ही वजन उठाने के लिए डिजाइन है। क्षमता से अधिक वजन से उन पर नुकसान होता है। ऐसे में जरूरी है कि रोजाना 30 मिनट की वॉक जरूर करें। कैल्शियम का ध्यान रखें।
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working lady
शरीर के पॉश्चर पर नजर रखें
घंटों गलत तरीके से बैठने, लेटने या खड़े होने से घुटनों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है। जरूरी है कि काम के दौरान ब्रेक लेते रहें, नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करें। खासकर घंटों बैठ कर काम करने वाले बीच-बीच में अपने पॉश्चर पर ध्यान देते रहे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
पेनकिलर्स से खुद को बचाएं
जरा सा दर्द हुआ नहीं कि हमने दवा खा ली। ऐसा नहीं करना चाहिए। अक्सर शरीर में दर्द रहता है तो डॉक्टर को दिखाएं और दवा लें। पेन किलर्स भले ही हमें दर्द से फौरन राहत दिला दे, लेकिन इससे कई तरह के साइड इफेक्ट हो सकते हैं। डॉक्टर के कहे अनुसार, तय समय के लिए ही दवा लें।
इन्हें न करें नजरअंदाज
जोड़ों का दर्द, अकड़न हो तो नजरअंदाज न करें। इसे उम्र बढ़ने का असर माने। विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श करें। घुटनों में सुबह-सुबह दर्द, जोड़ों में सूजन आर्थराइटिस के संकेत हो सकते हैं। महिलाएं तभी डॉक्टर के पास जाती हैं, जब यह स्थिति असहनीय हो जाती है। याद रखिए देरी नुकसानदायक होती है।