प्रसिद्ध गजल गायक गुलाम अली ने कहा है कि उन्हें भारत से हमेशा प्यार मिला है। उन्होंने कहा कि वे विरोध पर कुछ नहीं कहना चाहते हैं, बस चाहते हैं कि अल्लाह सबको अच्छे से रखे। वह कहते हैं कि मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। (गुलाम अली के कार्यक्रम में यूपी के राज्यपाल मौजूद थे वो उनसे बड़ी गर्मजोशी से मिले।)
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विरोध को भूल राज्यपाल से ऐसे मिले गुलाम अली, तस्वीरें
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‘अमर उजाला’ से रविवार को बातचीत में गुलाम अली ने कहा कि संगीत ने हमेशा से लोगों को जोड़ने का कार्य किया है। कला को देश और धर्म की सीमाओं में नहीं देखा जाना चाहिए। (राज्यपाल के साथ मंच पर मौजूद गुलाम अली।)
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उन्होंने यह भी कहा कि उनके जीवन के बहुत सारे महत्वपूर्ण वर्ष भारत में बीते हैं। लखनऊ महोत्सव में कार्यक्रम प्रस्तुत करने आए गजल सम्राट ने इस मौके पर लखनऊ में अपने कार्यक्रमों को भी याद किया। (राज्यपाल के साथ गुलाम अली।)
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उन्होंने कहा कि अल्लाह का शुक्र है कि लखनऊ में मुझे लोग बहुत प्यार से सुनते हैं। मैं 15-20 साल में 10-15 बार यहां आया हूं।
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गुलाम अली ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब पहली बार लखनऊ आया था तो तुलसी थिएटर में कार्यक्रम हुआ था। उस वक्त मैंने गजलें प्रस्तुत की थीं और इन गजलों को गाते हुए लगा था कि गजल अगर प्रस्तुत की जानी है तो पहली बार लखनऊ में ही प्रस्तुत की जानी चाहिए। (हल्के-फुल्के मूड में नजर आए यूपी के राज्यपाल व गुलाम अली।)
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उन्होंने बताया कि 27 अक्तूबर 1960 को लाहौर में मैंने पहला कार्यक्रम किया था। मुझे वह कार्यक्रम याद है क्योंकि उस कार्यक्रम में मेरे गुरुओं का नाम मेरे नाम के साथ कहा गया था।