आत्माओंं को देखने, महसूस करने और उनसे बात करने का दावा करने वाले इंडियन पैरानॉर्मल सोसाइटी के संस्थापक गौरव तिवारी (32) की बीते दिनों रहस्यमय तरीके से मौत हो चुकी है। ये बात बहुत ही कम लोग जानते हैं कि गौरव ने करीब छह-सात साल लखनऊ के इंदिरानगर में बिताए थे। एक प्रमोशन के सिलसिले में लखनऊ आए गौरव ने इस बात का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि उन्होंने लखनऊ में बहुत अच्छा वक्त बिताया था। आगे जानें, डर और नकारात्मक ऊर्जा के बारे में गौरव की राय...
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गौरव तिवारी
गौरव ने बताया था कि वह बचपन में जी चैनल पर आने वाले एक हॉरर शो की आवाज सुनकर भी डर जाते थे लेकिन पैरानॉर्मल चीजों को जानने के बाद उनका डर बिल्कुल खत्म हो गया। गौरव के मुताबिक हमारे मन में डर नहीं होना चाहिए डर दरअसल सिर्फ दिमाग की उपज होती है। गौरव के मुताबिक नकारात्मक ऊर्जा उन्हीं को परेशान कर सकती है जो डर जाते हैं। आगे, अनसुलझी है उनकी मौत की गुत्थी....
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गौरव तिवारी
बता दें कि गौरव दिल्ली में रहते थे। गौरव की टीम कई हॉंटेड जगहों पर रिसर्च कर वहां नकारात्मक शक्ति होने और न होने के प्रमाण दे चुकी है। बीती 7 जुलाई को सुबह 11 बजे गौरव की अचानक मौत हो गई। वह बाथरूम में थे और उनकी पत्नी और पिता ने अचानक तेज आवाज सुनी। गौरव की पत्नी ने बाथरूम में झांककर देखा तो वह बेहोश पड़े थे। अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया। गौरव की मौत की वजह अभी तक पता नहीं चल सकी है।
आगे पढ़ें, गर्दन पर मिला काला निशान...
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गौरव तिवारी
उनकी गर्दन पर काला बारीक निशान मिला है और डॉक्टरों का कहना है उनकी मौत दम घुटने से हुई। गौरव के पिता का कहना है कि उनका बेटा आत्महत्या नहीं कर सकता है। उसके पास आत्महत्या करने की कोई वजह नहीं थी हालांकि उनके मुताबिक उनकी बहू ने बताया कि गौरव ने एक महीने पहले कहा था कि कोई नकारात्मक ऊर्जा उन्हें खींच रही है जिस पर वह नियंत्रण नहीं कर पा रहे। गौरव की पत्नी ने काम का दवाब समझकर उनकी इस बात पर गौर नहीं किया। गौरव की मौत की वजह अभी तक साफ नहीं हो सकी हैं। गौरव के घरवाले नकारात्मक ऊर्जा की तरफ इशारा कर रहे हैं वहीं पुलिस मामले की जांच कर रही है। इन जगहों पर गौरव ने की थी रिसर्च...
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गौरव तिवारी
मथुरा के शिवताल के बारे में तरह-तरह की कहानियां प्रचलित हैं। पैरानॉर्मल सोसाइटी ऑफ इंडिया की टीम जब यहां की वास्तविकता की जांच करने पहुंची तो लोगों ने बताया कि यहां शाम ढ़लने के बाद जाने से लोग डरते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार शिवताल में कई लोगों डूबकर मर चुके हैं।
लोग बताते हैं कि यह मौत सामान्य नहीं असामान्य है। लोगों का मानना है, यहां की नकारात्मक उर्जा लोगों को अपनी ओर खीचती है और लोग पानी में खिंचे चले जाते हैं।
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जांच करते सदस्य
पैरानॉर्मल सोसाइटी ऑफ इंडिया की टीम जब यहां की वास्तविकता की जांच करने पहुंची तो लोगों ने बताया कि यहां शाम ढलने के बाद जाने से लोग डरते हैं। टीम ने जब यहां उपकरण का प्रयोग किया गया तो जो बात सामने आई उसे देखकर स्थानीय लोग घबरा गए। टीम के एक सदस्य के मुताबिक उन्हें उपकरणों में नकारात्मक ऊर्जा के संकेत मिले। इन्होंने बताया कि ताल और आस-पास के क्षेत्र में समुचित देखभाल और रखरखाब की कमी है जिसकी वजह से यहां नकारात्मक उर्जा का संचार हो रहा है। लेकिन डरने की बात नहीं है इसके जिर्णोद्धार की जरुरत है।
वहीं भानगढ़ किले के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि ये शापित है, कुछ लोग मानते हैं कि यहां भूत रहते हैं। यहां तक कि सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद वहां जाना भी मना है। लेकिन जब गौरव की टीम वहां पहुंची तो पता लगा कि वो जगह भूतों से नहीं बल्कि अफवाहों से घिरी है। एक मौका ऐसा भी आया जब एक पेड़ अचानक से हिलने लगा और उनकी टीम के सदस्य डर गए लेकिन जब हकीकत जानने के लिए पास गए तो पता चला कि वहां करीब 40-50 बंदर पेड़ हिला रहे थे। गौरव की टीम को वहां किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा के संकेत नहीं मिले थे।