टीम ने मेडिकल स्टोर के खरीद-फरोख्त से जुड़े बिल तलब किए हैं। टीम ने दुकान बंद करा दी। ड्रग इंस्पेक्टर रमा शंकर ने बताया कि जवाब देने तक दुकान को बंद कराने संग बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
मामले की जांच की जा रही है। नशे को कई गुना बढ़ाने के लिए नशेड़ी एविल इंजेक्शन में स्मैक मिलाकर लेते हैं। एविल इंजेक्शन नशेड़ियों की पहली पसंद बनने से मरीजों को यह इंजेक्शन मेडिकल स्टोर से उपलब्ध होना बंद हो गए हैं।
मरीजों को तो डॉक्टर के लिखने के बाद भी यह इंजेक्शन मेडिकल पर उपलब्ध नहीं है। 11 रुपये में बिकने वाला एविल इंजेक्शन नशेड़ियों को 40 से 50 रुपये में आसानी से मिल जाता है, जिसे दुकानदार अधिक मुनाफा कमाने के लिए डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मरीजों को नहीं देते हैं।
एविल इंजेक्शन को आग में गर्म किया जाता है। गर्म होने के बाद उसमें स्मैक पाउडर मिलाकर सीरिंज में भरकर नस में लगाया जाता है। गुनगुना इंजेक्शन नस में पहुंचते ही नशेड़ी बेसुध हो जाता है।
अमूमन स्मैक का नशा छह घंटे रहता है लेकिन एविल इंजेक्शन के साथ लगाने पर नशा 12 घंटे तक रहता है। बाजार में एविल इंजेक्शन नहीं मिलने पर उसके बदले डेक्सोना इंजेक्शन लगाया जा रहा है।