पेट की आग क्या होती है, जरा इन मजबूर मजदूरों से पूछिए। जैसे ही समाजसेवियों ने ट्रक पर सवार इन लोगों को केले दिए, सभी लपकने के लिए कूद पड़े। (सभी फोटो- कुलदीप सिंह।)
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- फोटो : amar ujala
दरअसल, लॉकडाउन के बाद से ही प्रवासी मजदूरों का अलग-अलग प्रदेशों से आना जारी है। इस दौरान कई सामाजिक संगठन उनकी मदद के लिए आगे आए हैं।
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सामाजिक संगठन उन्हें भोजन-पानी उपलब्ध करवा रहे हैं। शनिवार को ट्रक से जा रहे मजदूरों को जब केले दिए गए तो लेने के लिए उछल पड़े।
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शासन-प्रशासन की तरफ से भी इंतजाम किए गए हैं लेकिन वह नाकाफी ही नजर आ रहे हैं। लॉकडाउन गरीब व मजदूरों पर कहर बन कर टूटा है।