हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों के लिए राहत की खबर है। अब उनका इलाज आसान होगा। जांच और दवाएं मुफ्त मिलेंगी। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। पूरे प्रदेश में एक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। यह एड्स के इलाज के लिए बनी व्यवस्था जैसी ही होगी। केजीएमयू इसका नोडल सेंटर बनाया गया है। पहले चरण में केजीएमयू के अलावा 13 जिले चयनित किए गए हैं। यह व्यवस्था नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत बनाई जा रही है। अभी हेपेटाइटिस मरीजों के इलाज की पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
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डॉक्टर सुमित रुंगटा
- फोटो : अमर उजाला
मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार ने नई रणनीति अपनाई है। एड्स की तर्ज पर नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत पंजाब, राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों में इलाज शुरू कर दिया गया है। इस प्रोग्राम के संचालन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को मिली है। उत्तर प्रदेश में इसके लिए केजीएमयू को स्टेट नोडल सेंटर बनाया गया है। यहां विभिन्न सेंटर के चिकित्सकों और लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षित किया जाएगा। पहले चरण में 11 जिलों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है। प्रशिक्षण के लिए शासन ने 11.25 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। केजीएमयू गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने बताया कि कार्यक्रम की रूपरेखा तय हो गई है। चयनित सेंटरों के लैब टेक्नीशियन और मेडिकल ऑफिसर का जल्द ही प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। इसके बाद इलाज शुरू हो जाएगा।
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टीबी व एड्स से भी खतरनाक है वायरल हेपेटाइटिस
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायरल हेपेटाइटिस को टीबी व एड्स से भी खतरनाक माना है। वायरल हेपेटाइटिस में हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई आते हैं। भारत में एक करोड़ से अधिक हेपेटाइटिस सी के मरीज हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक 2.85 प्रतिशत मौतें इसकी वजह से हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने वायरल हेपाटाइटिस को वर्ष 2030 तक समाप्त करने का संकल्प लिया था। इसी क्रम में भारत सरकार ने भी वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस के उन्मूलन की दिशा में प्रतिबद्धता जताते हुए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया है। भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 28 अप्रैल 2018 को राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। इसके तहत सभी राज्यों में यह कार्यक्रम लागू हो रहा है। पंजाब और राजस्थान के बाद उत्तर प्रदेश तीसरा राज्य है, जहां इस कार्यक्रम की शुरुआत होगी।
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केजीएमयू बना नोडल सेंटर
इस कार्यक्रम के लिए केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को स्टेट लैब और गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी विभाग को मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर के रूप में चयनित किया गया है। यहां के डॉक्टरों को पूरे कार्यक्रम के संचालन के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब यहां के चिकित्सक चयनित 11 सेंटर के दो लैब टेक्नीशियन और दो मेडिकल ऑफिसर को प्रशिक्षित करेंगे।
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पहले चरण में शामिल हैं 11 सेंटर
पहले चरण में एलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ, आईएमएस बीएचयू वाराणसी, जिला चिकित्सालय झांसी, जिला चिकित्सालय उरई जालौन, जिला चिकित्सालय गौतमबुद्ध नगर, जिला चिकित्सालय सोनभद्र, एमएलएन मेडिकल कॉलेज प्रयागराज, पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय मेरठ, जिला चिकित्सालय इटावा, जिला चिकित्सालय बुलंदशहर, जिला चिकित्सालय मुरादाबाद, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर को शामिल किया गया है। यहां कार्यरत दो लैब टेक्नीशियन और दो मेडिकल ऑफिसर को कार्यक्रम संचालन के लिए नामित किया गया है। इन्हें केजीएमयू प्रशिक्षण देगा। इन सेंटरों पर दवाओं की आपूर्ति की व्यवस्था भी केजीएमयू देखेगा। इतना ही नहीं यहां से रेफर होने वाले मरीजों का इलाज केजीएमयू में किया जाएगा।
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कैसे होगा इलाज
इस कार्यक्रम की रूपरेखा काफी हद तक एड्स प्रोग्राम के तहत बनाई गई है। चयनित सेंटर पर हेपेटाइटिस के मरीजों की मुफ्त में जांच की जाएंगी और उन्हें दवाएं दी जाएंगी। संबंधित सेंटर को किसी तरह की दिक्कत होगी तो वह केजीएमयू में बने नोडल केंद्र से परामर्श लेगा। मरीज की स्थिति गंभीर होगी तो वह केजीएमयू सूचना देते हुए यहां रेफर कर देगा। केजीएमयू के गैस्ट्रोइंटरोलॉजी विभाग में हेपेटाइटिस के मरीजों के लिए बेड आरक्षित रहेंगे।
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जानिए, क्या होता है हेपेटाइटिस
यह यकृत की बीमारी है। वायरल संक्रमण या यकृत के हानिकारक पदार्थों संपर्क में आने से यह बीमारी होती है। पीलिया, ज्यादा थकान, भूख कम लगना, पेट फूलना इसके प्रमुख लक्षण हैं। हेपेटाइटिस बी से संक्रमित अधिकांश लोगों को वायरस से लड़ने और संक्रमण से पूरी तरह ठीक होने में दो माह लगते हैं। इसके क्रॉनिक होने पर जान जाने का खतरा रहता है। इसी तरह हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त, लार, वीर्य और योनि से निकलने वाले तरल पदार्थों में पाया जाता है। लंबे समय तक अल्कोहल लेने वालों को अल्कोहलिक हेपेटाइटिस हो जाता है। हेपेटाइटिस डी उन लोगों को होता है, जो पहले से हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होते हैं।
मरीजों को नहीं लगानी पड़ेगी केजीएमयू की दौड़
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से केजीएमयू को नोडल सेंटर चुना गया है। केजीएमयू की ओपीडी में हर माह करीब पांच से छह सौ मरीज पहुंचते हैं। जिलों में इसका इलाज शुरू होने मरीजों को केजीएमयू तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस प्रोग्राम की सफलता के लिए हर स्तर पर चुस्त एवं दुरुस्त व्यवस्था बनाई गई है। - डॉ. सुमित रुंगटा, विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी, केजीएमयू