प्रतीकात्मक तस्वीर
इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मुईनुद्दीन कानपुर के जूही सफेद कॉलोनी इलाके में रहता है। कुछ महीने पहले लखनऊ से कानपुर जाते वक्त रोडवेज बस में उसकी मुलाकात गोमतीनगर के उजरियांव निवासी सैय्यद मोहम्मद रहबर उर्फ सुल्तान से हुई थी। सुल्तान ने बताया कि निशातगंज की करामत मार्केट में उसकी एमएचके ट्रैवलिंग सर्विस नाम से एजेंसी है, जिसकी देखरेख उसका भाई तशरीफ हसन खान करता है। उसने बताया कि एजेंसी के जरिये वह खाड़ी देशों में नौकरी दिलवाते हैं। मुईनुद्दीन ने बताया कि सुल्तान ने उससे दोस्ती गांठ ली और कानपुर में घर आकर मां से बातचीत की। उसने मुईनुद्दीन की मां को शारजाह की टिश्यू पैकिंग फैक्ट्री में हेल्पर के पद पर नौकरी के लिए राजी कर लिया। सुल्तान का कहना था कि नौकरी करने पर हर महीने 1700 दरहम मिलेंगे जो भारतीय मुद्रा में करीब 32000 रुपये होते हैं। रहना मुफ्त होगा जबकि खाने के लिए 200 दरहम काटे जाएंगे। मां नौकरी के लिए सहमत हो गईं तो 22 जनवरी 2018 को मुईनुद्दीन निशातगंज स्थित ट्रैवल एजेंसी के ऑफिस पहुंचा और पासपोर्ट व 25 हजार रुपये नकद दे दिए। 26 अप्रैल 2018 को उसे फिर लखनऊ बुलाकर सुल्तान व तशरीफ हसन खान ने 25 हजार रुपये लेकर ऑफर लेटर पर हस्ताक्षर कराए। दो महीने बाद लेबर कार्ड बनवाने के नाम पर उससे 25 हजार रुपये और वीजा के नाम पर 20 अक्तूबर 2018 को 25 हजार रुपये लिए गए। अन्य बहानों से भी ठगों ने रुपया वसूला।