अटल विहारी वाजपेयी शायद अकेले ऐसे राजनेता होंगे जो वक्त पडऩे पर उस सच को भी लोगों के सामने रखने से परहेज नहीं करते थे जिससे नुकसान हो सकता था। पर, यह उनके अंदाज-ए-बयां का ही कमाल था। कि सच सुनने के बाद भी कोई इसका विरोध नहीं करता था। बात 80 के दशक की है। अटल जी की लखनऊ में सभा थी।
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उन्होंने कहा, ‘अखबारों में मेरे हवाले से छपा है कि कांग्रेस के लोग चाय वालों पर दबाव डाल कर चंदा ले रहे हैं।’ यह खबर कैसे छपी हमारे समझ में नहीं आता। जिस सभा का हवाला दिया गया है वहां तो मैंने यह कहा था, ‘ कांग्रेस हमारे (भाजपा) चाहने वालों पर दबाव डालकर चंदा ले रही है।’
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पर, पत्रकार तो अंदर की खोज कर लाने में माहिर होते हैं, सो वह हमारे भाषण में भी अंदर की खोज लाए। इसके लिए उन्हें धन्यवाद। भले ही हमने उस सभा ऐसा नहीं कहा था। पर, जो छपा वह सही निकला।’ उस सभा में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार प्रद्युम्न तिवारी बताते हैं, लोगों की समझ में नही आ रहा था कि अटल जी क्या कहना चाह रहे हैं।
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‘अटल जी बोले, ‘ पहले मुझे भी यह खबर अटपटी लगी थी लेकिन लखनऊ आते वक्त विमान में एक सज्जन हमारे पास आए और मुझसे कहा, ‘आपने बिल्कुल सच कहा। ’वास्तव में चाय के व्यापारियों पर दबाव डालकर चंदा ले रहे हैं। इसी से चाय की कीमतें बढ़ी हैं।
हमने कहा भी था कि धंधा मंदा है तो चंदा कहां से दें? कांग्रेस वालों ने कहा, ‘दाम बढ़ा दो। थोड़ा तुम रख लो और ज्यादा हमें दे दो।’ अटल बोले, ‘खबर छापने वालों को धन्यवाद। वह यह न छापते तो शायद चंदा वसूली का सच सामने न आता'।