किसान पथ की वो काली सुबह: "उस सुबह की पहली किरण भी ठीक से नहीं फूटी थी... जब एक चीख, एक हाहाकार ने किसान पथ की खामोशी को चीर दिया।" "एक आग थी... जो सिर्फ बस को नहीं, कई मासूम जिंदगियों को भी लील गई।"
"पापा... मम्मी... हमें बचा लो… ये मासूम चीखें अब भी गूंजती हैं, उस पिता के कानों में... जिसकी आंखों के सामने उसके नन्हें फूल तड़पते हुए मुरझा गए।" "एक गर्भवती मां, जलती बस की ओर दौड़ती रही… हर लपट में अपने बच्चों का चेहरा तलाशती रही…" "एक नन्हा बच्चा... जो अभी ''मां'' कहना सीख ही रहा था... अब अनाथ हो चुका है।" "किसी ने बचपन का दोस्त खोया… किसी ने बेटी, किसी ने मां…। किसान पथ पर मोहनलालगंज में हरिकंशगढ़ी के पास स्लीपर बस में लगी आग में मासूम भाई-बहन, मां-बेटी और युवक की जिंदा जलकर मौत हो गई।