बधाई के आदान-प्रदान के बाद चाय पर राजनीतिक चर्चा शुरू होती है। करीब 45 मिनट तक कई मुद्दों पर बातचीत होती है। इनमें उपचुनाव के नतीजे और राज्यसभा के 23 मार्च को प्रस्तावित चुनाव मुख्य हैं। अखिलेश उन्हें बताते हैं कि किस तरह दोनों संसदीय क्षेत्रों में किसान, मजदूर, पिछड़े, दलितों, नौजवानों ने एकजुट होकर मतदान किया। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल रहा, वोट भी ट्रांसफर हुआ। सामाजिक समीकरण अनुकूल रहा। मायावती ने उन्हें जानकारी दी कि किस तरह बसपा संगठन में ऊपर के निर्देश गांवों तक पहुंच जाते हैं। कोऑर्डिनेटरों ने उनके निर्देशों की जानकारी कार्यकर्ताओं को दी और बात मतदाताओं तक पहुंची।