लखनऊ के युवा खुद को हालात के अनुसार ढाल रहे हैं और जरूरत पड़ने पर परिस्थितियों को बदलने का हौसला भी रखते हैं। एमिटी स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट इसकी बानगी हैं। बहुत उत्साह के साथ ‘शो केस’ के लिए जुटे थे, जिसमें अंतिम वर्ष के छात्रों को अपने कलेक्शन के जरिए अपना हुनर दिखाना था। थीम तय थी, कपड़े खरीदे जा चुके थे, बस काम शुरू होना था। अचानक से लॉकडाउन लग गया। कॅरियर के पहले फैशन शो का सपना अधूरा रह गया। बावजूद, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वर्चुअल शो केस की तैयारी शुरू कर दी। किसी ने बहन, किसी ने दोस्त तो कोई खुद ही मॉडल भी बन गया। घर में जो कुछ संसाधन थे, उसमें उन्होंने अपने प्रोजेक्ट पूरे किए। इस दौरान क्या-क्या चुनौतिर्यां आईं और किस तरह से उन्होंने अपने हुनर को निखारा, आप भी जानिए...।
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दिव्या तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
पुराने कपड़े और मम्मी का नेकलेस आया काम
पंचतत्व की थीम पर अपना कलेक्शन तैयार करने वाली दिव्या तिवारी कहती हैं कि हम सब शो केस को लेकर उत्साहित थे, अचानक से सब बदल गया। ये महज संयोग है कि हम कपड़े खरीद चुके थे और मशीन हमारे यहां थी। एसेसरीज हमने नहीं खरीदी थी, घर में जो कुछ था उससे ड्रेस को सजाया। पुराने कपड़े, अपनी ईयर रिंग और मम्मी का नेकलेस काम आया। सिलाई में मदद के लिए टेलर तक जा नहीं सकते थे, ना ही क्लास में टीचर के सामने तैयार कर सकते थे। थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन 80 फीसदी ऑनलाइन क्लास और 20 फीसदी यू-ट्यूब की मदद से हमने ड्रेस तैयार की। संकट के समय कैसे काम होता है, यह सीखना मजेदार रहा।
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आरुषि
- फोटो : अमर उजाला
कपड़े से बनाए जेवर, खुद पर नई ड्रेस का किया ट्रायल
आरुषि ने बताया कि उन्होंने अपना कलेक्शन रफल-ट्रफल थीम पर तैयार किया है। मॉडल भी खुद ही बन गई। फोटो शूट के लिए कोई मिल नहीं रहा था तो खुद पर ही अपना कलेक्शन ट्राई किया। वहीं, ज्वैलरी की कमी कपड़ों के जेवर बनाकर पूरा किया। थोड़ी मेहनत ज्यादा लगी, लेकिन इतना तो समझ आ गया कि फैशन इंडस्ट्री में नए प्रयोग मायने रखते हैं और इसी में रचनात्मकता नजर आती है।
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दिव्या
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे प्रयोग भी किए युवाओं ने
- किसी ने टाई एंड डाई विधि से रंग भरे।
- किसी ने पुरानी पेंटिंग को नए रूप में बदलकर ड्रेस की डिजाइन तैयार की।
- किसी ने एंब्रायडरी से ज्वैलरी तैयार की।
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उर्वशी शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
बिजली के तार से ज्वैलरी बनाई और सहेली को मॉडल
उर्वशी शुक्ला कहती हैं कि मुझे प्लीटोग्राफी थीम मिली थी। लॉकडाउन में हमारे पास सिर्फ फैब्रिक था। टीचर की मदद से पहले ऑनलाइन प्लीटोग्राफी को समझा, उसके बाद काम शुरू किया। प्लीट्स को डिजाइन में बदलना, वो भी आपकी टीचर आपके सामने ना हो, मुश्किल था, लेकिन हो गया सब। ज्वैलरी की जरूरत थी, इसके लिए बिजली के तार का इस्तेमाल किया, फैब्रिक के साथ उसे जोड़ कर एसेसरीज बनाई। फोटोशूट के लिए अपनी सहेली को तैयार किया।
नया अनुभव, एक नई सोच में युवा हमेशा आगे
एमिटी स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी में असिस्टेंट प्रोफेसर लाली प्रिया कहती हैं कि इस दौरान हमने तो स्टूडेंट्स को बस एक राह दिखाई। कहा कि ‘यू कैन’, उन्होंने ऐसा कुछ कर दिखाया, जो लाजवाब है। एक से बढ़कर एक प्रयोग किए और तय समय पर डिजिटल शो केस का हिस्सा बने।