भारतीय किसान यूनियन ने शनिवार को विधानभवन के सामने गन्ना व धान के मूल्य को नाकाफी बताते हुए फसल जलाकर विरोध जताया। उन्होंने आलू किसानों की बदहाली बयां करने के लिए विधानभवन के सामने आलू भी फेंके। भाकियू ने गन्ना मूल्य 400 रुपये क्विंटल, धान का रेट 2500 रुपये और आलू का रेट 1000 रुपये क्विंटल घोषित करने की मांग की है।
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भाकियू के मंडल अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा की अगुवाई में किसान सवेरे 5.30 बजे ही विधानभवन के सामने पहुंचे। वे सांकेतिक तौर पर गन्ना और धान की फसल लेकर आए थे। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और गन्ना व धान की फसल जलाकर इनके घोषित मूल्य पर विरोध जताया।
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उनका कहना था कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले बकाया गन्ना मूल्य, घटतौली और आलू व धान किसानों की बदहाली के मुद्दे खूब उठाए थे। अब प्रदेश व केंद्र में भाजपा सरकारें हैं लेकिन किसानों की बदहाली दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। मात्र 10 रुपये की वृद्धि से किसानों की गन्ने की लागत भी नहीं निकल पाएगी। यह वृद्धि किसानों के साथ मजाक है। भाजपा नेता विपक्ष में रहते हुए 400 रुपये क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग करते थे लेकिन अब इससे पीछे हट गए हैं।
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भाकियू नेताओं ने कहा कि धान और आलू किसान संकट के दौर से गुजर रहे हैं। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में फसलों का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाने का वादा किया था लेकिन सरकार ने मिल मालिकों के दबाव में गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया। धान व आलू किसानों की भी चिंता नहीं की। 50 लाख गन्ना किसान बेबस हैं, उनमें रोष है। उन्होंने मांग की कि गन्ना मूल्य 450 रुपये, आलू का समर्थन 1000 रुपये क्विंटल और धान का समर्थन 2500 रुपये प्रति कुन्तल घोषित किया जाए।