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सेना की खुफिया विंग की मदद से फर्जी लेफ्टिनेंट कर्नल गिरफ्तार, कई जरूरी दस्तावेज बरामद

Thu, 25 Oct 2018 02:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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fake lieutenant colonel
फर्जी लेफ्टिनेंट कर्नल बनकर युवतियों को फंसाने वाले शातिर को सेना की खुफिया विंग की सूचना पर हजरतगंज पुलिस ने बुधवार की सुबह गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से पुलिस ने लाइसेंसी असलहा, ड्राइविंग लाइसेंस व कुछ अन्य दस्तावेज बरामद कर उसे जेल भेज दिया है। फर्जी रसूख व दिखावे में दर्जनों युवतियों को जाल में फंसाया। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि साइबर क्राइम सेल ने सेना खुफिया विंग की सूचना पर एक युवक को एसबीआई की कैसरबाग शाखा के पास से सफेद कार सहित दबोच लिया। पकड़ा गया फर्जी ऑफिसर मूलरुप से बहराइच के कानूनगो कॉलोनी का रहने वाला अरविंद मिश्रा है। वह लखनऊ में एक साल से अंसल सिटी में किराए के मकान में रहता था। अरविंद मिश्रा अपने आप को लेफ्टिनेंट कर्नल बताता था और अपनी कार व घर के बाहर भी लेफ्टिनेंट कर्नल की नेम प्लेट लगा रखी थी। यहीं नहीं वह वर्दी और बैच लगाकर भी चलता था।
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फर्जी फेसबुक आईडी बना गांठता था दोस्ती और फंसा लेता था जाल में
पुलिस के मुताबिक, अरविंद मिश्र ने राहुल मिश्रा नाम से फेसबुक पर एक फर्जी आईडी भी बना रखी थी। वह खुद को आर्मी अफसर बताकर लड़कियों को अपने जाल में फंसाता था। अरिवंद की पहली शादी 2003 में हुई थी और 2009 में उसका तलाक हो गया था। इसके बाद उसने जम्मू कश्मीर में रहने वाली एक लड़की से दूसरी शादी की थी, जिससे उसका विवाद चल रहा था। अरविंद ने जीवन साथी डॉट कॉम पर भी प्रोफाइल बनाई थी और कई लड़कियों को फंसाया था। उनके साथ वर्दी पहनकर घूमता था और टोल प्लाजा व होटल में फर्जी सेना का अधिकारी बन कर रौब झाड़ता था।
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गिरफ्तार हुआ फर्जी कर्नल - फोटो : amar ujala
सीडीएस में फेल हुआ, एमबीए किया पास, पर शुरू कर दिया फर्जीवाड़ा
सीओ हजरतगंज अभय मिश्रा के मुताबिक, अरविंद बेहतरीन छात्र रहा है। उसकी मां बहराइच में हेड मास्टर हैं और संपन्न परिवार के होने के चलते उसे पैसे की कमी नहीं थी। उसने 1997 में देहरादून से अर्थशास्त्र में एमए किया था। इसके बाद बहराइच के मैनेजमेंट कॉलेज से एमबीए किया था। दो बार उसने सीडीएस की लिखित परीक्षा पास की, लेकिन इंटरव्यू में वह सफल नहीं हो सका। इसके अलावा उसने कई साल कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में भी अधिकारी के पद पर तैनात रहा है। सेना में जाने का सपना पूरा नहीं हुआ तो उसने फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया। फर्जा वर्दी और नेमप्लेट बनवाई। कार पर गोरखा रायफल का प्रतीक चिन्ह लगाकर घूमने लगा। 

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इतना कुछ मिला आरोपी के पास
पुलिस ने उसके पास से लेफ्टीनेंट कर्नल अरविंद मिश्रा के नाम का ड्राइविंग लाइसेंस, एक लाइसेंस अरविंद मिश्रा के नाम का और हरियाणा नंबर की इंडिको कार जो कि कर्नल हरियाणा के पते पर पंजीकृत है। इसके अलावा शस्त्र लाइेंसस रिवॉल्वर, एक रिवॉल्वर, दो एटीएम, डेबिट कार्ड, वालमार्ट मेंबरशिप कार्ड व 3 मोबाइल के अलावा कई अन्य दस्तावेज भी बरामद किए हैं। 
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चालक को भी पहनाता था सेना की वर्दी
पुलिस के मुताबिक, अरविंद अपने कार चालक को भी सेना की वर्दी पहनाता था। अक्सर वह चालक भी बदलता था। वह चालक को दिन के हिसाब से बुलाता था। एक चालक को दो से तीन दिन तक साथ रखा फिर जगह के साथ चालक भी बदल देता था। 
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महिला मित्र ने की थी साइबर सेल से शिकायत
साइबर सेल प्रभारी विजय बीर सिंह सिरोही ने बताया कि अरविंद मिश्रा और उसकी पत्नी हिना जमवाल की शिकायत महिला मित्र व परिवारीजनों ने की थी। महिला मित्र भी अरविंद के मूल जिले में पड़ोसी थी। उसके साथ अरविंद की मां और उसका छोटा भाई भी आया था। महिला मित्र ने हिना और अरविंद पर उसकी सामाजिक छवि धूमिल करने का आरोप लगाया था। 
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तीन महीने से सेना की खुफिया विंग कर रही थी निगरानी
सेना के खुफिया विंग के अधिकारी के मुताबिक, अरविंद मिश्रा पर संदेह होने पर तीन महीने से उसकी हर हरकत पर नजर थी। वह अपनी पत्नी हिना जमवाल को लेकर कई दिनों तक बतौर अधिकारी लखनऊ कैंट परिसर, इलाहाबाद, दिल्ली, पंजाब और जम्मू कश्मीर के सेना के बेस कैंप में कई दिनों तक बतौर अधिकारी रहा था। उस पर खुफिया जानकारी लीक करने का संदेह है। 
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कश्मीर में पत्नी थी पार्षद, आईएसआई एजेंट के संपर्क में है 
सेना के खुफिया विंग के अधिकारी के मुताबिक, अरविंद की कश्मीरी पत्नी वहां से पार्षद भी रही है। वह कुछ दिनों तक केन्द्रीय विद्यालय में बतौर शिक्षिका रही। कुछ दिन बाद उसे निकाल दिया गया। अरविंद से उसका संपर्क करीब 2013 से हुआ। दोनों ने कुछ दिन बाद शादी कर ली। हिना का संबंध आईएसआई से होने की सूचना मिली है। इसके बाद हिना की निगरानी की गई तो उसके अरविंद से संबंध होने की जानकारी मिली। इसी के बाद मामला खुला और फर्जी लेफ्टिनेंट का सच सामने आया। विंग के अधिकारी बताते हैं कि हिना का अरविंद से संपर्क सिर्फ सेना के बेस कैंप में घूमने के लिए ही बना था। उसने अपना काम पूरा कर लिया इसके बाद अरविंद का साथ छोड़कर चली गई।
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