खाकी वर्दी का रौब और पैसा कमाने की चाहत में 12 हजार रुपये देकर फर्जी इंस्पेक्टर बनी शाहीन बानो लखनऊ में हाईवे पर वसूली करती पकड़ी गई। राजधानी के मोहनलालगंज में फुलवारिया तिराहे पर मंगलवार की सुबह वसूली का खेल चल रहा था। सूचना मिली तो असली पुलिस वहां पहुंच गई। शाहीन ने खुद को अमेठी कोतवाली में तैनात बताकर उन्हें अर्दब में लेने की कोशिश की, लेकिन उसकी पोल खुल गई। वह फर्जी हमराह और चालक के साथ पकड़ ली गई। तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
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फर्जी इंस्पेक्टर शाहीन
- फोटो : amar ujala
प्रभारी निरीक्षक धीरेंद्र प्रताप कुशवाहा ने बताया कि मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे फुलवारिया तिराहे पर वाहनों से पुलिस द्वारा वसूली की सूचना मिली थी। उपनिरीक्षक संजय कुमार, जय सिंह, सिपाही भूपेश विक्रम सिंह और दो महिला सिपाहियों को मौके पर भेजा गया तो पता चला कि सफेद रंग की स्कॉर्पियो में वर्दी पहने महिला बैठी है, जिसकी नेम प्लेट पर इंस्पेक्टर शाहीन बानो लिखा है। दो युवक ट्रक चालकों के कागजात जांच रहे थे।
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फर्जी इंस्पेक्टर शाहीन
- फोटो : amar ujala
उपनिरीक्षक ने महिला इंस्पेक्टर से वाहन चेकिंग के बारे में पूछा तो उसने खुद को अमेठी कोतवाली में तैनात बताया। कागजात जांच रहे रायबरेली के बछरावा गाजियापुर शेखपुर समाधा गांव निवासी राम किशोर और हरचंदपुर के जोहवा सर्की गांव के जितेंद्र को अपना हमराह और चालक बताया था। अमेठी पुलिस से पूछताछ में ऐसी किसी तैनाती की जानकारी नहीं मिली। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि सिपाही भूपेश विक्रम की तरफ से फर्जी इंस्पेक्टर और उसके हमराह व चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
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फर्जी इंस्पेक्टर शाहीन
- फोटो : amar ujala
चोरी की दाढ़ी में तिनका : ऐसे खुली पोल - बैच के बारे में पूछा तो भड़क गई
उपनिरीक्षक ने आईकार्ड मांगा जो उसके पास नहीं था। बैच के बारे में पूछने पर भी फर्जी इंस्पेक्टर भड़क उठी। पीएनओ नंबर पूछने पर वह कोई जवाब नहीं दे सकी। शक होने पर पुलिसकर्मियों ने तीनों को पकड़ लिया और कोतवाली ले आए। यहां सख्ती से पूछताछ करने पर महिला टूट गई और उसने सच्चाई उगल दी। - काले जूते, मोनोग्राम और बेल्ट का उल्टा चपरास
प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि फर्जी इंस्पेक्टर काले रंग के चमड़े के जूते और सफेद मोजे पहने थी, जबकि पुलिसकर्मी ड्यूटी के वक्त लाल रंग के जूते और भूरे रंग के मोजे पहनते हैं। उसने जो बेल्ट पहनी थी, उसका चपरास भी उलटा लगा हुआ था। वर्दी में लगा पुलिस का मोनोग्राम उसने दाएं बाजू में लगा रखा था। यह मोनोग्राम बाएं बाजू पर लगता है। -कार पर डाला शासन का फर्जी नंबर
फर्जी पुलिसकर्मी जिस स्कॉर्पियो से आए थे, उस पर शासन की सीरीज का नंबर डाल रखा था। प्रभारी निरीक्षक ने कार के कागजात मांगे जो शाहीन बानो नहीं दिखा सकी। कार को मोटर वाहन अधिनियम के तहत सीज कर दिया गया है। कार किसकी है, इस बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
कोर्ट में मिला था जालसाज, देता था इंस्पेक्टर बनाने का झांसा
शाहीन बानो ने बताया कि तलाक के केस की पैरवी के लिए कचहरी आते-जाते उसे सुनील अग्रवाल नाम का शातिर मिला था। बातों के जाल में फंसाकर शाहीन बानो को प्रभावित कर लिया। सुनील ने खाकी वर्दी से खिलवाड़ की जानकारी दी। उसने ही शाहीन बानो को फर्जी इंस्पेक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। बकौल शाहीन, शातिर ने उसे इंस्पेक्टर बनाने का झांसा देकर 12000 रुपये भी ऐंठ लिए। उसने ही वर्दी, बेल्ट, सितारे और मोनोग्राम दिलाया। इसके बाद उसकी तैनाती अमेठी थाना में होने की बात कही। शाहीन का कहना है कि सुनील ने कई लोगों को इंस्पेक्टर बनाने के नाम पर रुपये ऐंठे हैं। पुलिस सुनील अग्रवाल नाम के शातिर की तलाश कर रही है।