डॉ अनुपम वाखलू
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गठिया की जांच बेहद जरूरी
गठिया एक तरह से 40 बीमारियों का समूह है। यह कुष्ठ और ऑटो इम्यूनल बीमारियों से भी जुड़ी हुई है। इसलिए इसकी जांच बेहद जरूरी होती है। हड्डियों में कैल्शियम व जरूरी खनिज पदार्थ कम होने से हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। इस रोग में प्यूरिन नामक प्रोटीन के मेटाबॉलिज्म की विकृति होती है। यूरिक एसिड की वृद्धि भी एक वजह है। यह हाथ, पैर, अंगुली सहित शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है। ब्लड संबंधी जांच और एक्स-रे के जरिए बीमारी पकड़ में आ जाती है। इस बीमारी में जोड़ों में जकड़न, जोड़ों से आवाज आना, हाथ, पैर या अंगुलियां टेढ़ी होना, पालथी मारकर बैठने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे में विटामिन डी वाली सब्जियों एवं फलों का नियमित और भरपूर प्रयोग करना चाहिेए। पुराने जौ, गेहूं आदि का प्रयोग करना चाहिए। डेयरी उत्पादों, संतरे का रस, दूध और अनाज आदि विटामिन डी की कमी को पूरा करते हैं। गठिया और इससे जुड़ी ऑटो इम्यूनल डिजीज की जांच सुविधा केजीएमयू में उपलब्ध है। अब कम उम्र के लोगों में भी यह बीमारी होने लगी है। घुटने की आर्थराइटिस से पीड़ित लगभग 30 प्रतिशत रोगी 45 से 50 साल की उम्र वाले हैं। जबकि 18 से 20 प्रतिशत रोगी 35 से 45 साल के हैं।
- प्रो. अनुपम वाखलू, विभागाध्यक्ष, गठिया रोग विभाग