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लखनऊ: पुलिस ने रिक्रिएट किया गिरधारी के एनकाउंटर का सीन, परिजनों ने लगाया था हत्या का आरोप

Sat, 06 Mar 2021 02:39 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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एनकाउंटर स्थल का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala
लखनऊ पुलिस ने शनिवार को अजीत सिंह हत्याकांड के मुख्य शूटर पूर्वांचल के कुख्यात अपराधी गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर के एनकाउंटर का क्राइम सीन रिक्रिएट किया। बता दें कि मामले में परिजनों ने पुलिस पर गिरधारी की हत्या करने का आरोप लगाया था।

वहीं, कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेकर पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने आदेश दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने निचली कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी लेकिन मामले पर कोर्ट के रूख को देखकर लखनऊ पुलिस कार्रवाई कर रही है। कोर्ट ने केस दर्ज करने की अर्जी देने वाले को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च नियत की है।

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने यह आदेश राज्य सरकार की पुनरीक्षण याचिका पर दिया। इसमें मुकदमा दर्ज करने संबंधी सीजेएम लखनऊ के आदेश को चुनौती दी गयी थी।
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- फोटो : amar ujala
राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही की दलील थी कि अभियोजन की स्वीकृति के बगैर सरकारी कर्मियों के खिलाफ वादी की अर्जी पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश नहीं दिया जा सकता था। ऐसे में सीजेएम का आदेश कानून की मंशा के खिलाफ होने की वजह से रद्द किए जाने लायक है।

सीजेएम लखनऊ की अदालत ने आजमगढ़ के सर्वजीत सिंह की अर्जी पर 26 फरवरी को एनकाउंटर टीम में शामिल रहे डीसीपी ईस्ट संजीव सुमन, विभूतिखंड थाने के इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह व अन्य पुलिस अफसरों-कर्मियों पर हत्या का केस दर्ज करने का आदेश दिया था।

सीजेएम की कोर्ट ने इस मामले में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश इंस्पेक्टर हजरतगंज को दिया था। साथ ही एफआईआर की प्रति सात दिन में अदालत में पेश करने को कहा था।
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एनकाउंटर स्थल का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala
25 फरवरी को कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश देते हुए कहा था कि किसी एक घटना में मात्र एक पक्ष की ओर से ही मुकदमा दर्ज कराए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। घटना के दूसरे पक्ष को, जो खुद को घटना से या दर्ज मुकदमे से पीड़ित मानता है, उसे भी अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।

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- फोटो : amar ujala
कोर्ट ने कहा था कि थाने से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति की मृत्यु मुठभेड़ के दौरान हुई। मृत्यु पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में हुई या आत्मरक्षा के दायरे से बाहर जाकर कोई कृत्य किया गया, यह विवेचना का विषय है। अजीत हत्याकांड के आरोपी गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर की पुलिस कस्टडी के दौरान कथित मुठभेड़ में मौत मामले में सीजेएम सुशील कुमारी ने कहा था कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा निर्देश है कि संलिप्त पुलिस टीम के खिलाफ किसी नजदीकी थाने में मामला पंजीकृत होना चाहिए और उसकी विवेचना संलिप्त पुलिस टीम के मुखिया से वरिष्ठ श्रेणी के अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए।
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एनकाउंटर स्थल का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala
कोर्ट ने यह भी कहा था कि मामले के संज्ञान के समय अभियोजन स्वीकृति के संदर्भ में यह स्थिति है कि मात्र प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराया जाना संज्ञान लेने की परिधि में नहीं आता है। इसके साथ ही उक्त संरक्षण किसी भी लोक सेवक को ऐसे कृत्य के विरुद्ध प्राप्त नहीं होता, जिसमें स्वीकृत रूप से एक आपराधिक कृत्य हुआ है।
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