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30 से 50 साल के लोग हो जाएं सतर्क, इस वजह से हो सकता है कैंसर तक का खतरा

Tue, 20 Mar 2018 04:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेंमो
30 से 50 वर्ष की उम्र के बीच के लोग सबसे ज्यादा नाखुश हैं। इस उम्र के लोगों में तनाव व असंतुष्टि की समस्या अन्य से कहीं ज्यादा है। केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में तनाव व डिप्रेशन की समस्या लेकर आने वाले मरीजों में सबसे अधिक संख्या 30-50 के बीच की आयु केे हैं।
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- फोटो : डेमो
यह जानकारी केजीएमयू के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. विवेक अग्रवाल ने दी। उन्होेंने बताया कि इस उम्र के लोगों की नाखुशी का कारण कार्यक्षेत्र में होने वाली समस्याएं, बेरोजगारी व घरेलू झगड़े व अनबन होती है।
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डेमो - फोटो : डेंमो
इनमें घरेलू महिलाओं की संख्या भी कम नहीं हैं। जॉब न करने वाली महिलाएं तनावग्रस्त हैं। वहीं 10 प्रतिशत बच्चे की पढ़ाई को लेकर तनावग्रस्त रहते हैं।
 

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केजीएमयू मानसिक रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि भावनाओं का स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। यह बात वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि शरीर एक केमिकल बॉडी होती है इस पर भी भावनाएं गहरा असर करती हैं।
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डेमो - फोटो : डेंमो
पहले वैज्ञानिकों की राय थी कि जेनेटिक प्रणाली परिवर्तित नहीं हो सकती, लेकिन अब शोध में ये बातें स्पष्ट हो चुकी हैं कि वातावरण व भावात्मक स्थिति से जीन में भी परिवर्तन होते है। अगर व्यक्ति खुश रहना है तो पॉजिटिव इमोशंस से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं। खुश रहना जेनेटिक स्ट्रक्चर को मॉडिफाई कर सकता है। वहीं, तनाव लेने से मानसिक के साथ शारीरिक बीमारियां भी बढ़ती हैं।
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डेमो
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि तनावपूर्ण जीवन व नाखुश रहने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की संभावना भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि भावनाओं से जेनेटिक सिस्टम के प्रभावित होने को एपि जेनेटिक्स कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोधों में साबित हो गया है कि जो लोग बचपन में बाल शोषण, गाली गलौच या स्ट्रेस के माहौल में रहते हैं उन्हें आगे चलकर मानसिक बीमारियां होने की आशंका ज्यादा रहती है।
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- फोटो : डेमो
इसके अलावा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे से संबंधित रहते हैं। अगर कोई खुश नहीं रहता वो कुछ समय बाद मानसिक रूप से बीमार रहने लगता है। मानसिक तौर से अस्वस्थ्य रहने पर आगे चलकर हाइपरटेंशन, डायबिटीज, एलर्जी आदि की दिक्कत हो सकती है। 

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- फोटो : डेंमो
इसके अलावा क्रोनिक डीजीज, कैंसर, डायबिटीज, हड्डी की गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं। कई शोध में यह साबित हो चुका है कि दुखी या तनाव में रहने से आगे चलकर कैंसर होने की आशंका वातावरण या बाहरी कारणों के मुकाबले ज्यादा होती है।
 

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डेमो - फोटो : डेंमो
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि ब्रेन दो तरह से काम करता है। मस्तिष्क बीती हुई चीजों का विश्लेषण कर वर्तमान व भविष्य की चीजों का आकलन करता है। लेकिन जब व्यक्ति अपने गुजरे समय में जीने लगता है तो उसमें डर की भावना घर करने लगती है।

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इसी तरह जब व्यक्ति भविष्य के बार में योजना कर उसमें खो जाता है तो यह उसे चिंता और निराशा की तरफ ले जाता है। इसकी वजह से वो वर्तमान में सुख को गवां देते हैं। ऐसे लोग जीवन में सबसे ज्यादा तनावग्रस्त होते हैं। जिंदगी को खुशगवार बनाने के वर्तमान में जीना चाहिए।
 

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डेमो - फोटो : डेंमो
तनाव से होने वाली दिक्कतें-
- ज्यादा तनाव लेने से डिप्रेशन।
- घबराहट होना
- चीजों को व्यक्त न कर पाना है
- नींद न आना
- स्वभाव में आक्रामकता
- कार्यों में एकाग्रता की कमी
- जीवन के प्रति हताशा व निराशा
- स्वभाव में अनिश्चितता
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- फोटो : डेंमो
खुश रहने के तरीके-
- रचनात्मक कार्यों में हिस्सा लें
- परिवार व दोस्तों के साथ समय बिताएं
- सामाजिक कार्यों में हिस्सा लें
- वर्तमान पर फोकस कर के जिएं
- दूसरों की मदद करें
- नियमित रूप से एक्सरसाइज करें
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