लखनऊ के सबसे अनोखे शिवालयों में शुमार हैं द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर। देशभर में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों को उनके स्वरूप में विराजमान किया गया है।
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सदर बाजार स्थित इस प्राचीन मंदिर की महिमा अपार है। तीन मंजिला मंदिर में बाबा भक्तों के लिए थोड़ा आधुनिक तरीके से विराजे हैं। मान्यता है कि सावन के महीने में यहां पूजा करना बेहद शुभ होता है। शिवलिंग के दर्शन मात्र से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
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इलाकाई भक्त बताते हैं कि करीब पौने दो सौ साल पहले बाजार के पास बने पुराने मंदिर में बाबा का पुराना स्वरूप विराजित था, लेकिन कुछ साल पहले भक्तों के सहयोग से मंदिर को द्वादश ज्योतिर्लिंग का स्वरूप दूसरी मंजिल पर विराजित किया गया।
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हर मंदिर और शिवलिंग को बिल्कुल वैसा ही स्वरूप देने का प्रयास किया गया, जैसा वो वास्तविक स्वरूप में विराजित है। बाबा का जलाभिषेक करने के लिए यहां जल लाने की आवश्यकता नहीं है।
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हर शिवलिंग पर स्वचलित शावर लगे हैं, जो भक्त के स्पर्शमात्र से ही जलाभिषेक शुरू कर देते हैं। मंदिर में मुख्य शिवलिंग नीचे पुरानी जगह पर ही स्थित है।
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मौजूदा समय में मंदिर अपने वास्तविक रंग रूप में नौ ग्रह मंदिरों के अलावा, राधा कृष्ण, हनुमान, दुर्गाजी भी विराजी हैं। मंदिर की देखभाल शिवालय सेवा एवं प्रबंधन समिति करती है। मंदिर में चढ़ाया गया जल कई सौ फीट नीचे रीचार्ज होने के लिए पहुंच जाता है। सावन में यहां सामूहिक रुद्राभिषेक होते हैं।
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वहीं सावन के पहले दिन लखनऊ के श्री तपेश्वरी नीलकंठ महादेव मंदिर में भगवान शिव की 1008 दीपों से आराधना की गई। नीलकंठ की महाआरती के बाद भोग लगाकर प्रसाद बांटा गया।