बात 1990 की है। प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। विहिप के आह्वान पर अयोध्या में एकत्र हजारों कारसेवक जब विवादित ढांचे की ओर बढ़े तो सुरक्षा कर्मियों ने गोलियां चला दी। कई कारसेवक मारे गए। इसकी प्रतिक्रिया में देश के कई शहरों में हिंसा भड़क उठी। कई शहरों में कर्फ्यू लगा था।
इसी बीच एक दिन कल्बे सादिक अचानक पहुंच गए बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के नेता और वकील तथा बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी के घर। बोले, अच्छा यही होगा कि जमीन हिंदुओं को सौंपकर अमन-चैन और भाईचारा बचा लिया जाए। हालांकि उनकी इच्छा उस समय पूरी नहीं हो पाई। लेकिन उनकी पहल यह बताने को पर्याप्त है कि वे कितने दूरदर्शी थे।
जीलानी बताते हैं कि मौलाना साहब उस समय तक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष बन चुके थे। उन्होंने मुझसे कहा, सिर्फ शहर ही नहीं देश जल रहा है। क्यों न मस्जिद की जमीन हिंदुओं को दे दी जाए। इससे न सिर्फ अच्छा संदेश जाएगा बल्कि पूरे देश का माहौल बेहतर होगा। जीलानी बताते हैं कि जब मौलाना साहब उनके पास आए थे तो कर्फ्यू लगा हुआ था।
उन्होंने आते ही सवाल किया, जो हालात हैं उनमें मुसलमानों की सुरक्षा की क्या व्यवस्था है? इसलिए कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे हालात ठीक हो सकें। जमीन सौंपने को लेकर जीलानी ने उनसे कहा, आप इसके लिए पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष से मिलिए। बोर्ड की बैठक बुलाई जाए उसमें यह प्रस्ताव रखिए। बहुमत की राय बनती है तो हमें कोई एतराज नहीं।
उस समय बोर्ड के अध्यक्ष अली मियां नदवी थे। वह रायबरेली में थे। कर्फ्यू वहां भी था। लेकिन मौलाना हिंसा से इतना दुखी थे कि वह कर्फ्यू के बीच ही लखनऊ से रायबरेली पहुंचे। नदवी के सामने पूरी बात रखी। नदवी ने अगले ही माह बोर्ड की बैठक बुला ली। हालांकि बैठक में कल्बे सादिक के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी।
पर, उनके इस काम ने यह साबित कर दिया कि उनका नजरिया क्या था। सादिक की इस कोशिश को काफी गोपनीय रखा गया ताकि बाहर यह संदेश न जाने पाए कि पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य ही बाबरी मस्जिद पर बंटे हुए हैं। पर जब यह बात तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को पता चली तो उन्होंने जफरयाब जीलानी से बात भी की थी।
जमीन नहीं, दिल जीतना ज्यादा जरूरी
डॉ. सादिक सरकार के फैसलों के साथ ही अयोध्या सहित अन्य कई मुद्दों पर अपने समुदाय की राय से असहमत और उन्हें नसीहत देते दिखे। 2019 में सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला आने वाला था। सिर्फ वह थे जिन्होंने कहा, अब भी वक्त है।
मुसलमानों को अयोध्या की जमीन जीतने से ज्यादा हिंदुओं का दिल जीतने की फिक्र करनी चाहिए। पहले ही काफी चूक हो चुकी है पर अब अदालत यदि जमीन मुसलमानों को देने का फैसला भी करे तो भी अच्छा यही होगा कि मुसलमान हिंदू भाइयों को जमीन गिफ्ट कर दें। मस्जिदें तो कई हैं, लेकिन हिंदू भाइयों की आस्था अगर वहीं से जुड़ी है तो उसे दे देना ही ठीक है।