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एक्सप्रेस-वे पर हादसाः आग की लपटों के बीच बेटी को सीने से लगाए मदद के लिए चीखती रही मां

Tue, 26 Mar 2019 01:57 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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आगरा एक्सप्रेस वे पर हादसा - फोटो : amar ujala
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर कुछ ही पल में चार जिंदगियां मौत के आगोश में समा गईं। इससे पहले सभी ने संघर्ष किया लेकिन अपनी जान बचाने में नाकाम रहे। ज्योति छह वर्ष की बेटी निति को सीने से लगाए चीखती रही, लेकिन कोई भी मदद की हिम्मत नहीं जुटा सका। मां के कलेजे से लिपटी बेटी का शव देख हर किसी की आंखें भर आईं।
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आगरा एक्सप्रेस- वे पर हादसा - फोटो : amar ujala
रविवार की रात करीब एक बजे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर बस से आग की लपटें उठती देख लोग मौके पर आ गए। इस बीच कुछ वाहन सवार भी रुके, लेकिन आग की भयावहता देखकर वे मदद की हिम्मत नहीं जुटा सके। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो ज्योति अपनी छह वर्ष की बेटी को सीने से लगाए बस में इधर उधर दौड़ रही थी। वह मदद के लिए चीख रही थी, लेकिन बस के शीशे बंद होने के कारण लोग उसकी चीख सिर्फ महसूस कर पा रहे थे।
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आगरा एक्सप्रेस- वे पर हादसा - फोटो : amar ujala
ज्योति ने बस का शीशा तोड़ने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। बस के चालक और परिचालक ने भी बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन बस लॉक होने के कारण वह खुद को बचा नहीं सके। (मैनपुरी से नीलेश शर्मा की रिपोर्ट)
मालूम हो दिल्ली से लखनऊ आ रही आलमबाग बस टर्मिनल की स्कैनिया बस रविवार देर रात आगरा एक्सप्रेस-वे पर हादसे की शिकार हो गई। इसमें राजाजीपुरम के सी-188 निवासी डॉ. ज्योति निर्वाण (38) बेटी निति के साथ सवार थीं। दुर्घटना में मां-बेटी की मौत हो गई। चूंकि, मासूम मां की छाती से चिपटी हुई थी, इसलिए हादसे के बाद दोनों को अलग नहीं किया जा सका।

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आगरा एक्सप्रेस- वे पर हादसा - फोटो : amar ujala
दमकल पहुंचने तक सब कुछ हो चुका था खत्म
लोगों की मानें तो पुलिस और दमकल के पहुंचने तक बस को आग ने अपने आगोश में ले लिया था। आग बुझने के बाद बस के अंदर का मंजर देख लोगों का दिल दहल गया। ज्योति और बेटी निति का शव बस की गैलरी में पड़ा था। दोनों शव एक दूसरे से चिपके हुए थे। कुछ दूरी पर चालक और परिचालक के शव पड़े थे।
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आगरा एक्सप्रेस- वे पर हादसा - फोटो : amar ujala
इनकी गई जानः 1.डॉ. ज्योति जैक निर्वाण (38), पत्नी डॉ. निशांत, सी-188 राजाजीपुरम थाना ताल कटोरा, लखनऊ 2.निति (6), पुत्री डॉ. निशांत, सी-188 राजाजीपुरम थाना ताल कटोरा, लखनऊ  3.इसरार अहमद, बस चालक (33), स्याना, बुलंदशहर 4.धनंजय मौर्य, परिचालक (40), जाखमई, प्रतापगढ़

घायलः 1.सौरभ श्रीवास्तव, एफ-216 ग्रीनवुड अपार्टमेंट, गोमती नगर, लखनऊ 2. मृदुल नेथानी, सर्वोदयनगर, लखनऊ  3. धर्मवीर सिंह, दूसरा चालक, लुधपुरा, बुलंदशहर

 
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आगरा एक्सप्रेस- वे पर हादसा - फोटो : amar ujala
पीजीआई में सीनियर डिमॉन्स्ट्रेटर थीं डॉ. ज्योति
मैनपुरी बस हादसे में छह साल की बेटी निति के साथ दम तोड़ने वालीं डॉ. ज्योति एसजीपीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीक्यूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी विभाग में सीनियर डिमॉन्स्ट्रेटर के पद पर कार्यरत थीं। उनकी मौत की सूचना मिलते ही एसजीपीजीआई के चिकित्सकों में शोक की लहर दौड़ गई। करीब दो साल पहले वह संस्थान से जुड़ीं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एमएससी बायोटेक्नोलॉजी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बायोमेडिकल साइंस में पीएचडी की। इसके बाद एसजीपीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीक्यूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी विभाग में सीनियर डिमॉन्स्ट्रेटर के रूप में ज्वॉइन किया।
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आगरा एक्सप्रेस- वे पर हादसा - फोटो : amar ujala
यहां कार्य करते हुए भी विभिन्न संस्थानों में निकलने वाली नियुक्तियों में हिस्सा लेती थीं। वह पखवारेभर से अवकाश पर थीं। उनके दिल्ली में किसी परीक्षा में जाने की जानकारी सहयोगियों को नहीं है। उन्हें सोमवार को संस्थान आना था, लेकिन उनकी मौत की खबर आई। यह सुनते ही संस्थान में शोक की लहर दौड़ गई। पहले विभाग में शोकसभा हुई। इसके बाद प्रशासनिक भवन में भी शोकसभा कर श्रद्धांजलि दी गई।
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संस्थान ने एक प्रतिभा को खो दिया
निदेशक प्रोफेसर राकेश कपूर ने कहा कि संस्थान ने एक होनहार प्रतिभा को खो दिया है। इसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। उधर, शाम को एसजीपीजीआई रेजीडेंट एसोसिएशन ने भी शोकसभा कर डॉ. ज्योति को श्रद्धांजलि दी।

 
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