कोरोना से जंग में अब लोग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। इसके लिए जड़ी-बूटियों पर उनका भरोसा बढ़ गया है। यह आयुर्वेदिक औषधि नहीं, बल्कि दैनिक दिनचर्या में तेजी से शामिल हो गई है। इसका ही असर है कि मई से जून के बीच थोक मंडी में जड़ी-बूटी का कारोबार करीब 10 गुना बढ़ गया। वहीं, आयुर्वेदिक स्टोर पर पिछले दस से 15 दिनों में बिक्री में 30 फीसदी वृद्धि की बात कही जा रही है। शहर का सबसे बड़ा जड़ी-बूटी का बाजार सआदतगंज में है। सआदतगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रमिल गुप्ता बताते हैं कि यहां से देश भर में माल सप्लाई होता है। बड़ी-बड़ी आयुर्वेदिक कंपनियों की ओर से जबरदस्त मांग है।
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कारोबारी महेश जैन व अशोक जैन बताते हैं कि बाजार में गिलोय भरपूर है। कोरोना के चलते इसके थोक दाम 25 से 50 रुपये किलो हुए जरूर, लेकिन अब वापस 25 रुपये हो गए हैं। वहीं, तुलसी की जबरदस्त मांग है। महेश जैन कहते हैं कि महोबा, हमीरपुर से न आ पाने के कारण तुलसी बाजार से गायब है।
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किसानों का आरोप है कि उनकी गाड़ी को गांजा बताकर वन विभाग और पुलिस रोकती है, इसलिए उन्होंने माल लाने से इन्कार कर दिया है। महेश जैन के मुताबिक रामा और श्याम तुलसी मांग में रहती हैं। थोक में 80 रुपये वाली तुलसी के दाम 115 रुपये किलो हैं। बताया कि प्रवासी मजदूरों के आ जाने से गिलोय भरपूर काटी गई और इकट्ठा हुई है।
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तनाव कम करने वाले प्रोडक्ट की मांग भी बढ़ी
गोमतीनगर स्थित आयुर्वेदिक स्टोर की संचालिका और सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. मधुर रे कहती हैं कि दस से 15 दिनों में बिक्री 30 प्रतिशत बढ़ी है। तनाव कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने वाले प्रोडक्ट की जबरदस्त मांग है। कोरोना के चलते एक बार फिर लोगों का विश्वास आयुर्वेद में जगा है।
सआदतगंज बाजार की थोक कीमतें
गिलोय 25
तुलसी 115
कालीमिर्च 300 रुपये
अश्वगंधा 250-300 रुपये
सोंठ 150-225 रुपये तक
चिरायता 45 रुपये किलो
दालचीनी 250 रुपये
मुलेठी 150
अहियागंज मंडी से थोक रेट
तुलसी 260 रुपये
अश्वगंधा 400 रुपये
मुलैठी 240 रुपये
दालचीनी 360
गिलोय 80 रुपये
फुुटकर बाजार में रेट
गिलोय 200 रुपये
तुलसी 800 रुपये
काली मिर्च 600 रुपये
अश्वगंधा 500 रुपये
सोंठ 300 रुपये
चिरायता 400 रुपये
मुलैठी उपलब्ध नहीं
(फुटकर रेट कई बाजारों से लिए गए हैं)