मगरमच्छ के अंडे जब परिपक्व हो जाते हैं तो उनमें से एक विशेष तरह की आवाज आने लगती है। अंडों से बच्चे निकलने की प्रक्रिया बड़ी रोचक है। अंडों से निकलने वाली आवाज सुनकर मादा घड़ियाल कैसे ये बच्चे निकालती हैं देखें, बहराइच के कर्तनिया घाट का ये नजारा...
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अंडों से इस तरह से निकलते हैं मगरमच्छ, लाइव तस्वीरें
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तराई के अधिक तापमान से नन्हे घडिय़ालों ने निर्धारित समय से पहले ही बहराइच की गेरुआ नदी के टापू पर दस्तक दे दी है। बीते दिनों अलग-अलग घोसलों से 820 नन्हे मेहमानों ने टापू पर आंखे खोल दीं। इन सभी को सुरक्षित नदी में छोड़ दिया गया है।
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इस समय अनुमान के मुताबिक नदी में लगभग 310 वयस्क घडिय़ाल मौजूद हैं। प्रति वर्ष मार्च माह के अंत में घडिय़ाल नदी के टापू पर अंडे देकर उन्हें बालुओं में सहेज कर घोसला बना देते हैं।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन का कहना है कि जब अंडो में बच्चे परिपक्व हो जाते हैं। तो उनसे विशेष किस्म की आवाज निकलने लगती है।
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टापू के आसपास मौजूद मादा घडिय़ाल आवाज को सुनकर घोसले तक पहुंचती है और घोसले के ऊपर से बालू हटा देती है। इस पर अंडो से निकले बच्चे सुरक्षित नदी में पहुंच जाते हैं। कभी-कभी मादा घडिय़ाल नहीं पहुंच पाती है। तब आवाज के आधार पर खुद घोसले खोलना पड़ता है।