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अपराध की दुनिया में 'डॉक्टर ऑफ डेथ' के नाम से मशहूर था गिरधारी, अजीत सिंह की हत्या के लिए दो महीने की थी रेकी

Tue, 16 Feb 2021 04:30 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
अजीत हत्याकांड का मुख्य आरोपी व शूटर गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर रविवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया। पुलिस गिरधारी को तीन दिन की कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही थी। जिसमें उसने अजीत हत्याकांड से जुड़े कई राज खोले।

संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध नीलाब्जा चौधरी के मुताबिक, छह जनवरी को कठौता चौराहे पर मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अजीत सिंह की छह शूटरों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। इसमें मुख्य भूमिका वाराणसी के कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर उर्फ लोहार ने निभाई थी। उसने ही शूटरों का इंतजाम किया था।
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- फोटो : अमर उजाला
जेसीपी क्राइम के मुताबिक, पूछताछ में गिरधारी ने कई राज उगले थे। उसने पुलिस को बताया था कि अजीत की हत्या कुंटू व अखंड सिंह के कहने पर की गई थी। इसके लिए वह दोनों से मिलने आजमगढ़ जेल भी गया था। मामले में पूर्वांचल के बाहुबली नेता की भी भूमिका थी। उसने रविवार को अलकनंदा अपार्टमेंट के फ्लैट से मोबाइल भी बरामद कराया था। इसमें मिले एक मोबाइल में सिर्फ पांच मोबाइल नंबर सेव थे। इन्हीं नंबरों पर बातचीत हुई थी।
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पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के मुताबिक, रिमांड में गिरधारी ने स्वीकार किया था कि वह पिछले साल जुलाई में लखनऊ आ गया था। अलकनंदा अपार्टमेंट में अंकुर के फ्लैट में रहकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा। अजीत की हत्या के लिए दो महीने रेकी की। गिरधारी व साथी शूटरों ने अजीत को 25 गोलियां मारी थीं। इस दौरान मोहर सिंह व राहगीर आकाश यादव घायल हुआ था।

गैंगवार में गिरधारी के अलावा कुंटू सिंह, अखंड सिंह सहित छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस अभी तक तीन मददगार व एक शूटर को गिरफ्तार कर चुकी है।

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एनकाउंटर स्थल का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala
गिरधारी पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मारा गया था। पुलिस उसे लेकर असलहा बरामद करने खरगापुर निकली थी, जहां मौका पाकर उसने दरोगा पर सिर से वार किया और सरकारी पिस्तौल छीनकर भागने लगा। अन्य पुलिसकर्मियों ने पीछा किया तो फायरिंग कर दी। एसएसआई के दाहिने हाथ में गोली लगी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में गिरधारी गंभीर रूप से घायल हो गया। लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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- फोटो : amar ujala
जुर्म की दुनिया में गिरधारी के थे कई नाम
पुलिस के मुताबिक गिरधारी का असली नाम कन्हैया विश्वकर्मा था लेकिन जुर्म की दुनिया में आने के बाद कई नए नाम मिलते गये। इसमें गिरधारी, डॉक्टर, लोहार, टग्गर, डीएम, रॉबिनहुड जैसे नाम शामिल हैं। उसे अपराध की दुनिया का डॉक्टर ऑॅफ डेथ कहा जाता था। लोग बताते हैं कि वह शरीर के उसी हिस्से पर गोली मारता था जहां लगने के तत्काल बाद मौत हो जाए। बचने का कोई मौका न मिले। देश के12 जिलों के अपराध रजिस्टर में गिरधारी का नाम दर्ज हैं।
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- फोटो : amar ujala
गैंगवार की रकम अंकुर के खाते में जमा कराई
एनकाउंटर के पहले पूछताछ में गिरधारी ने कुबूल किया था कि उसे गैंगवार के लिए जो भी रकम मिली थी। उसे अंकुर के खाते में जमा कराया था। इसके लिए आर्थिक मदद भी कुंटू व अखंड के कहने पर मिलती रही। कुंटू के एक दोस्त ने अंकुर व बंधन के खाते में हत्या से पहले लाखों रुपये जमा कराई थी। जिसे दोनों ने निकाल कर लोगों को जरूरत के मुताबिक देते रहे।

पूछताछ में पुलिस को शूटर रवि यादव के बारे में पूरी जानकारी मिली। रवि आजमगढ़ के ओच्छवां गांव का रहने वाला है। उद्यम सिंह का वह करीबी बताया जाता है। साथ ही उसका संबंध सुनील राठी गिरोह से भी रहा है। पुलिस का कहना है कि रवि यादव, राजेश तोमर व मुस्तफा कोर्ट में समर्पण करने की फिराक में है।
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- फोटो : अमर उजाला
सत्ताधारी नेताओं के करीब रहता था
गिरधारी काफी तेज दिमाग का था। वह समय के साथ अपनी आस्था भी बदल देता था। प्रदेश में जिसकी सरकार रहती थी। उसके मजबूत नेता के करीब पहुंच जाता था। 2005 में जौनपुर में चेयरमैन विजय गुप्ता की हत्या के बाद राजनैतिक दल के बाहुबली नेता का खास बन गया। यह करीबी काफी लंबे समय तक चलती रही। 2007 में प्रदेश में बसपा की सरकार बनी तो आजमगढ़ के विधायक सर्वेश सिंह का करीबी बन गया। इसके बाद 2012 में सरकार बदली तो उसने दूसरे दल का दामन थाम लिया। जिसके बाद बसपा विधायक से दुश्मनी हो गई।
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