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अजीब और रहस्य भरी है जया की जिंदगी, पढ़िए कुछ किस्से

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एनटीरामा राव का स्वास्थ्य खराब हुआ तो चंद्र बाबू नायडू को आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया, उसी दौरान जयाप्रदा को राज्यसभा से सांसद नामित किया गया। 1996 में जयाप्रदा तेलुगू महिला की अध्यक्ष बनीं।
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अजीब और रहस्य भरी है जया की जिंदगी, पढ़िए कुछ किस्‍से

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जया प्रदा एक बार फिर से चर्चाओं में हैं। चर्चा की वजह देर रात आरटीओ दफ्तर खोलकर उनके लाइसेंस बनाने की वजह से जुड़ी हैं। जया प्रदा के बारे में ये  बातें आम नहीं जानते होंगे। उनका जीवन हमेशा किसी न किसी वजह से चर्चाओं में रहा है।
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जयाप्रदा का असली नाम ललिता रानी है। फिल्मों में आने के बाद जैसे कई कलाकारों के नाम बदलते हैं वैसे ही ललिता रानी जया प्रदा हो गईं।  ललिता उर्फ जया का जन्म 3 अप्रैल 1962 में आंध्र प्रदेश के राजाहमुंडरी जिले में हुआ था। जया के पिता कृष्णा राव तेलुगू फिल्मों के फाइनेंसर थे। फिल्‍मी बैकग्राउंड होने की वजह से ही जया फिल्मों की तरफ आकृष्ट हुईं। जया के फिल्मी कैरियर की शुरुआत तेलुगू फ़िल्म 'भूमिकोसम' से हुई। इसमें जया का छोटा सा रोल था।

अजीब और रहस्य भरी है जया की जिंदगी, पढ़िए कुछ किस्‍से

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जयाप्रदा की शादी 1986 में श्रीकांत नहाटा से हुई, जो पहले से शादीशुदा थे। नहाटा के पहली पत्नी से तीन बच्चे थे। शादी पर कई विवाद उठे, क्योंकि जयाप्रदा से शादी करने से पहले उन्होंने पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया था।
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जया प्रदा का मामला इसलिए बहुत रोचक है क्योंकि जया से शादी करने के बाद भी उनके पति अपनी पहली बीवी से अलग नहीं हुए। जया से शादी करने के बाद भी उन्होंने अपनी पहली बीवी से बच्‍चे पैदा किए और जया उनके पति और पति की पहली बीवी खुशी-खुशी साथ रहने पर सहमत हुए थे।
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जयाप्रदा-श्रीकांत के कोई संतान नहीं है, लेकिन जब वो उनसे अलग हुईं, तब उन्होंने बच्चे की चाहत शब्दों में प्रकट की थी। फिल्मी करियर को चरम पर पहुंचाने के बाद जयाप्रदा तेलुगू देसम पार्टी में 1994 में शामिल हुईं। उन्हें तेदेपा में लाने वाले एनटी रामाराव थे।
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2000 के आसपास जया तेदेपा छोड़ कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं। माना जाता है कि जया प्रदा को पार्टी में लाने के पीछे अमर सिंह की बड़ी भू‌मिका थी। अमर सिंह उनके मित्र और राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं। अमर और जया के रिश्तों के बारे में गॉसिप लगातार राजनीति में बनी रहती है।
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2004 में उन्होंने रामपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और 85 हजार वोटों से जीतीं। पांच साल तक सांसद रहने के बाद 2009 में एक बार फिर जयाप्रदा चुनाव जीतीं। जब अमर सिंह सपा से अलग हुए तो जया भी उनके साथ अलग होकर लोकदल पार्टी में शामिल हो गईं। अब एक बार फिर से जब अमर सिंह के सपा में वापसी की खबरों की अटकलें शुरु हुई हैं तो यह माना जा रहा है कि जया की वापसी भी सपा मे हो सकती है।
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