लॉकडाउन के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल कक्ष की टीम दिन-रात जुटी है। कंट्रोल कक्ष में तैनात तीस से अधिक कोरोना फाइटर्स अपने परिवार की परेशानियों को भूल कर जरूरतमंदों के मददगार बने हैं। किसी की बुजुर्ग मां घर में अकेली है तो किसी ने पत्नी व बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए गांव में छोड़ दिया है। कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित हाईटेक तकनीक युक्त कंट्रोल कक्ष 24 घंटे संचालित रहता है और इस दौरान यहां 8 से 10 घंटे की शिफ्ट में कर्मचारी काम करते हैं। सुबह से लेकर रात तक कंट्रोल कक्ष से जुड़ी हेल्पलाइन पर घंटी घनघनाती रहती है। 23 मार्च से शुरू हुए इस कंट्रोल कक्ष के माध्यम से अब तक 12 हजार से अधिक शिकायतों का संतोषजनक निस्तारण कराया जा चुका है। लॉकडाउन के दौरान यहां हर दिन करीब 700 से 750 तक शिकायतें आती हैं। इनमें राशन आदि न मिलने से लेकर घर से दूर परिजनों की परेशानी से जुड़ी शिकायतें भी दर्ज की जाती हैं। काम काज के दौरान कोरोना संक्रमण से बचने को कॉल सेंटर में सोशल डिस्टेसिंग के साथ ही अन्य सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया जाता है। इस दौरान हर दो घंटे में हर कर्मचारी की थर्मल स्क्रीनिंग का कार्य भी अनिवार्य तौर पर कराया जाता है।
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मयंक श्रीवास्तव
- फोटो : amar ujala
ड्यूटी पर आने से पहले घर के काम
कैसरबाग के एक हॉटस्पॉट इलाके के निवासी मयंक श्रीवास्तव सुबह से लेकर रात तक पूरी सजगता से कंट्रोल रूम में शिकायतों की सुनवाई व निस्तारण कराने में जुटे रहते हैं। घर में बुजुर्ग नाना-नानी व मां की जरूरतों को ड्यूटी पर आने से पहले पूरा करने की आदत बना चुके मयंक कहते हैं कि परिवार में कोई और ऐसा सदस्य नहीं है जो घर परिवार की जरूरतें पूरी करने में मददगार बन सके। कंट्रोल रूम में कार्य के दौरान नाश्ता व दोपहर के खाने की चिंता छोड़ कर बस हर पीड़ित को त्वरित मदद दिलवाने की सोच ही कायम रहती है।
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शुभम पांडेय।
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संक्रमण से बचाने के लिए पत्नी और बच्चे को गांव में छोड़ा
कोरोना से जंग में अधिकारियों के साथ ही कंधे से कंधा मिलाकर लगातार कामकाज कर रहे अपर जिलाधिकारी प्रशासन के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शुभम पांडेय ने तो बीते एक माह से पत्नी व बच्चे को अपने से दूर गांव भेज दिया है। खुद सरकारी आवास में अकेले रह कर सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक कोरोना संक्रमण से निपटने को टीम के साथ जुटे रहते हैं। ऐसे में कई बार रात में बिना खाना खाए ही सोना पड़ता है। इसके बावजूद आपदा प्रबंधन से जुड़ी हर पत्रावली व दस्तावेज लगातार अपडेट बनाए रखने की जिम्मेदारी को बखूबी पूरा करते हैं।
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सविता सिंह।
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परिवार का हौसला बना मददगार
जिला स्तरीय कंट्रोल कक्ष में नियमित तौर पर 8 से 10 घंटे तक कार्य करने वाली सविता सिंह बताती हैं कि लॉकडाउन के इस कठिन दौर में जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना काफी चुनौती भरा कार्य लगता है। इस दौरान परिवार में मौजूद पति व अन्य सदस्यों ने जिस तरह उत्साह बढ़ाया वह काफी मददगार साबित हुआ। परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी संभालने वाले पति का कहना है कि अगर हम अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे तो दूसरे पीड़ितों को सहायता कैसे मिलेगी। परिवार के इस सहयोग से ही इस काम को एक बड़ी जिम्मेदारी समझ निभाती हूं।
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नेहा शर्मा।
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हर पीड़ित की संतुष्टि का रहता है जज्बा
कंट्रोल रूम में तैनात युवा ऑपरेटर नेहा शर्मा बताती हैं कि सुबह से रात तक लगातार आने वाली कॉल की शिकायतों को संबंधित विभाग के माध्यम से शत प्रतिशत निपटाना भी बड़ी चुनौती होता है। जिसकी समस्या दूर नहीं होती वह कई बार फोन करता है। ऐसे में हर पीड़ित की परेशानी को निस्तारित कराने के लिए खुद पर समन्वय करती हूं। घर पहुंचने पर हाथ पैर को सैनिटाइज कर स्नान करने के बाद ही परिवार के अन्य लोगों के संपर्क में आ कर सोशल डिस्टेसिंग कायम रख बातचीत होती है।
कंट्रोल रूम के नंबरों पर करें शिकायत
लॉकडाउन के दौरान शहरवासियों को किसी भी तरह की परेशानी से राहत पहुंचाने को जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश के निर्देश पर कलेक्ट्रेट में सर्वर बेस्ड कंट्रोल कक्ष रूम संचालित है। कोई भी जरूरतमंद 0522-2629219, 2610170 और 2622627 पर कॉल कर अपनी परेशानी बता सकता है। प्राप्त शिकायतों को कस्टमर रिड्रेसल मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से पूरी गुणवत्तापूर्ण तरीके से निस्तारित कराया जाता है। शिकायत का पूरा ब्योरा मिलने के बाद शिकायकर्ता व कम्युनिकेशन प्लान के अनुसार निर्धारित निवारणकर्ता अधिकारी के पास स्वत: एसएमएस से भेजकर निस्तारण बाद क्रास चेक भी होता है।