लखनऊ की युवा कवयित्रियां और लेखिकाएं भी हिंदी के उत्थान में अपना अमूल्य योगदान दे रही हैं। कविता तिवारी और शिखा श्रीवास्तव जैसी कवयित्रियां तो देशभर में ही नहीं, विदेशों तक में अपनी रचनाओं से बेहद लोकप्रिय हैं। आइये आज हम आपकी मुलाकात करवा रहे हैं राजधानी की कुछ ऐसी ही युवा कलमकारों से जिन्होंने हिंदी मंचों पर न सिर्फ अपना अलग मुकाम बनाया बल्कि हिंदी के नवांकुरों के लिए प्रेरणा भी बनीं।
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कविता तिवारी
- फोटो : amar ujala
कविता ने दी ओज को प्रखर पहचान
वैसे तो हिंदी मंचों पर ज्यादातर कवयित्रियां शृंगार रस में ही कविता पढ़ रही हैं, लेकिन शुद्ध हिंदी में कविता पढ़ने वाली कवयित्रियों में लखनऊ की कविता तिवारी देश की सबसे समृद्ध कवयित्रियों में शामिल हैं। कविता ने बहुत कम समय में हिंदी मंचों पर अपनी अलग पहचान बना ली है। देश के सभी बड़े मंचों पर कविता की उपस्थिति उस समारोह की सफलता की गारंटी मानी जाती है। उनके सोशल मीडिया पर लाखों प्रशंसक हैं। उन्हें हिंदी में कविता पढ़ते देख नए रचनाकार भी खासे प्रभावित होते हैं।
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शिखा श्रीवास्तव
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रेलवे में हिंदी का चेहरा हैं शिखा श्रीवास्तव
रेल प्रबंधक कार्यालय उत्तर रेलवे लखनऊ में कार्यरत शिखा श्रीवास्तव ने सामाजिक सरोकार और शृंगार की रचनाओं से देश के बड़े काव्य मंचों से लेकर विदेश तक में काव्यपाठ किया है। साथ ही टीवी चैनल्स पर भी कार्यक्रमों में उनकी बराबर सहभागिता रहती है। शिखा रेलवे में हिंदी का चेहरा हैं।
अपनी मातृभाषा पर दिया जाए जोर
परीक्षार्थियों की हिंदी में दयनीय स्थिति के बारे में शिखा कहती है कि यह जमाना अब कम्प्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन का है अब हम कागज पर लिखने की बजाय की बोर्ड पर ज्यादा लिखते है इसलिए सरकार को चाहिए कि स्कूलों में बच्चों को कागज पर हिंदी लिखना सिखाने के साथ उन्हें हिंदी टाइपिंग में दक्ष बनाए। साथ ही पचास के दशक में गठित वैज्ञानिकी और तकनीकी शब्दावली आयोग का पुनर्गठन करके शब्द निर्माण मामले में सरलीकरण की आवश्यकता है। केंद्र और राज्य सरकारों को दसवीं के बजाय 12वीं कक्षा तक हिंदी भाषा और साहित्य को अनिवार्य भाषा बनाना चाहिए और विदेशी जर्मन, फैंच भाषा सीखने की बजाय अपनी मातृभाषा सीखने पर जोर देना चाहिए।
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डॉ कीर्ति अवस्थी
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अंग्रेजी की शिक्षिका हैं हिंदी की कहानीकार
डॉ. कीर्ति अवस्थी अंग्रेजी विषय की शिक्षिका होने के साथ हिंदी कथा साहित्य के क्षेत्र में निरंतर क्रियाशील हैं। आपका एक कहानी संग्रह सुबह का चांद वर्ष 2019 में प्रकाशित हो चुका है। इसके अतिरिक्त देश-विदेश की कई साहित्यिक पत्रिकाओं में आप की कहानियां प्रकाशित हुई हैं। डॉ. कीर्ति एक यूट्यूब चैनल की संचालिका भी हैं। उनका दूसरा कहानी संग्रह ‘खुशी-बेवजह’ प्रकाशित होने वाला है। उन्हें कहानी संग्रह ‘सुबह का चांद’ के लिए प्रज्ञा साहित्य सम्मान 2019 तथा मुसन्निफ ए अवध 2020 से सम्मानित किया गया है।
अमर उजाला के अभियान ने हिंदी सेवियों को जगा दिया
डॉ. कीर्ति मानती हैं कि हिंदी हैं हम अभियान ने पूरे देश के हिंदी सेवियों को जगाने का काम किया है। इस अभियान ने आशा की नई किरण का काम किया है।
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शालिनी पांडेय
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अपने लेखन के साथ दूसरों को भी दे रहीं बढ़ावा
शालिनी पांडेय सरल यूं तो सरकारी शिक्षिका हैं, लेकिन हिंदी साहित्य के प्रति अपनी रुचि के कारण काव्य लेखन में भी सक्रिय हैं। मंचों पर काव्य पाठ के अलावा उन्होंने साहित्यांगन नाम से एक संस्था की शुरुआत की है, जिसमें वे हिंदी कलमकारों को प्रोत्साहित करती हैं। शालिनी ने बताया कि अमर उजाला का हिंदी हैं हम अभियान हर वर्ग के लेखकों, कवियों और आम जन के लिए लाभकारी तो है ही साथ में नई पीढ़ी को भी इससे प्रेरणा मिलेगी।
भावना के पृष्ठ पर सजे रेनू के गीत
रेनू द्विवेदी पिछले कई वर्षों से हिंदी साहित्य लेखन के साथ मंचों पर भी सक्रिय हैं। उनके गीतों का संग्रह भावना के पृष्ठ पर प्रकाशित हो चुका है और पानी में भी प्यास : गीतिका संग्रह प्रकाशित होने वाला है। कई साझा संग्रह भी आ चुके हैं। रेनू द्विवेदी को सृजन युवा सम्मान, साहित्य सुधाकर, काव्य भारती, साहित्य गौरव समेत कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन में भी उनकी रचनाओं का प्रसारण हो चुका है।
अमर उजाला का अभियान बहुत सराहनीय
रेनू द्विवेदी ने कहा कि अमर उजाला ने हिंदी हैं हम अभियान के जरिए एक सराहनीय पहल की है, जिसका व्यापक असर हो रहा है। ऐसे अभियानों से हिंदी को निश्चित रूप से गति और समृद्धि मिलेगी।