राजकुमार, दतिया।
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दो दिन बाद मिलीं पूड़ियां, तब आया सुकून
राजकुमार ने बताया कि बाराबंकी में मजदूरी करता था। वहां से पैदल ही परिवार के साथ लखनऊ तक आ गया। रास्ते में खाने को कहीं मिला ही नहीं। दो दिन हो गए थे। लखनऊ में खाने के पैकट मिले। अब झांसी के आगे दतिया जाना है। बस के इंतजार में बैठा हूं। कुछ लोगों ने बताया शकुंतला मिश्रा विवि चले जाओ तो यहां चला आया। अब अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं। कहते हैं, बस चलाएंगे, जब संख्या हो जाएगी।