लॉकडाउन से सबसे अधिक चोट रेस्टोरेंट कारोबारियों को लगी है। लॉकडाउन में यह व्यवसाय पूरी तरह ठप रहा। एक जून से कारोबार शुरू हुआ तो रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। कहने को तो लखनऊ के 3000 रेस्टोरेंट खुल चुके हैं, जिनमें ग्राहकों को बैठकर खाने की पूरी छूट हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के डर से ग्राहक रेस्टोरेंट को देखने भी नहीं जा रहा है। सिर्फ जिनके पास खाना बनाने का इंतजाम नहीं है वही शहर के 20 फीसदी रेस्टोरेंट में पहुंच कर खाना खा रहे हैं, जिससे 15 फीसदी कारोबार हो रहा है। कारोबारियों ने बताया कि 3000 रेस्टोरेंट में से 80 फीसदी ग्राहकों के लिए बंद हैं। अधिकतर रेस्टोरेंट में ऑनलाइन बुकिंग के जरिये खाने की डिलीवरी कराई जा रही है। इसमें सबसे ज्यादा रोटी, दाल, सब्जी बिक रही है, जिससे 25 फीसदी कारोबार चल रहा है। यानी लॉकडाउन से पहले जो कारोबार लगभग दो करोड़ रुपये रोजाना था, वह वर्तमान में 80 लाख के करीब हो गया है, जिसमें मुनाफे का अंश बहुत कम है। सिर्फ लागत निकल रही है।