प्रतीकात्मक तस्वीर
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पितर देवतुल्य... उन्हें तो रोज याद करना चाहिए
बालागंज निवासी आचार्य शिव शंकर पांडेय कहते हैं कि लिखा तो यह गया है कि पूर्वजों को रोजाना याद करना चाहिए। जो रोज उनको याद नहीं कर सकते या विधि विधान से उनका पूजन नहीं कर सकते हैं, उनके लिए पितृपक्ष का प्रावधान किया गया है। कहीं भी किसी खरीदारी को लेकर प्रतिबंध का जिक्र नहीं है, बल्कि पितरों को याद करके खरीदारी कीजिए, वे अपने बच्चों की खुशी देख खुश होते हैं। दरअसल एक प्रथा किसी जमाने में शुरू हुई, देखा-देखी लोगों ने उसको परंपरा बना लिया। पारा निवासी पंडित राम विजय शुक्ल कहते हैं कि पितृ तो हमारे देवतुल्य हैं। जब वे देवता के समान हो गए तो वे अशुभ कहां से हो गए। पितृपक्ष को अशुभ कहीं नहीं गया गया। न ही नए सामान नहीं खरीदने का प्रावधान कहीं मिलता है। जिस तरह सावन शिव को, नवरात्र देवी मां को समर्पित है, उसी तरह से ये 15 दिन पितरों को समर्पित हैं।