कमरे में कम ही रहते हैं डॉक्टर साहब। लंबी लाइन लगाने के बाद जब इन मरीजों का नम्बर आया तो डॉक्टर साहब दोस्तों से बतियाने निकल गए।
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यहां खुले में होता है प्लास्टर, अंधेरे में करते हैं इलाज!
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डॉक्टर के आने का इंतजार करते मरीज।
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अस्पतालों में सुविधाएं तो नहीं है मगर वो डॉक्टर भी गायब हैं जिनका मरीज घंटों से इंतजार कर रहे थे।
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ये नजारा करीब सुबह 11 बजे का है। गोसाईंगज सीएचसी में इस समय तक भी अल्ट्रासाउंड रूम में ताला जड़ा हुआ था। मरीज बेसब्री से ताला खुलने का इंतजार कर रहे थे।
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ठंड में जहां मरीजों को कंबल और अच्छे बिस्तर नहीं दिए जा रहे वहीं वार्ड में लगी खिड़कियों के शीशे भी टूटे हुए हैं। ऐसे में मरीजों पर क्या गुजरती होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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मरीज हुए बेसहाराः यहां टूटी पड़ी है व्हीलचेयर।
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ये देखिए अस्पताल के वार्ड के पीछे की गंदगी। क्या ये गंदगी किसी बड़े इंफेक्शन को जन्म नहीं देगी। बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पूरी तरह से फेल हो चुका है।
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यही वो बिस्तर हैं जिन पर बिमार मरीजों को सुलाया जाता है। ये बिस्तर मरीजों के मर्ज को और भी बढ़ा देते हैं।
यहां खुले में होता है प्लास्टर, अंधेरे में करते हैं इलाज!
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अस्पतालों की व्यवस्था राजधानी में अंधेर नगरी की तरह है। गोसाईगंज सीएचसी के वार्ड में 16 बेड पर एक ही लाइट है। अस्पताल में पसरा है अंधेरा।