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व्हील चेयर पर बैठा हूं पर नाचने को दिल कर रहा है, पढ़ें और क्या बोले पूर्व सैनिक

Fri, 30 Sep 2016 01:52 PM IST
टीम डिजिटल/अमरउजाला, लखनऊ
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पूर्व सैन‌िक - फोटो : amar ujala
सेना ने पाकिस्तान में आतंकी शिविरों को नेस्तनाबूद कर शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया है। इससे न केवल सैनिकों का, बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों का मनोबल भी बढ़ा है। दिलों में जान फूंकने का काम किया है मोदी सरकार ने। हालांकि, ऐसी कार्रवाई की जरूरत उस वक्त ही पैदा हो गई थी, जब मुंबई में आतंकी हमला हुआ था। पर, तत्कालीन सरकार की मुर्दादिली व खामोशी से आतंकियों के हौसले बढ़ गए थे। अब उनके परों को बहुत ही सधे हुए ढंग से सेना ने काटा है, जो सराहनीय है।
-सेवानिवृत्त कर्नल आरपी सिंह, इन्फेंट्री बटालियन, राजपूत रेजीमेंट
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पूर्व सैन‌िक - फोटो : amar ujala
पाकिस्तान सिर्फ एक ही भाषा जानता व समझता है और वह है दहशत की। इसलिए पाक को उसकी जुबां में जवाब देकर भारतीय सेना ने जवानों का मनोबल बढ़ाया है। इससे उन जवानों की रूहों को शांति मिली है, जो सीमा की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। सरकार ने आतंकी शिविरों पर हमला करवाकर शहीद जवानों की इज्जत वापस लौटाने का काम किया गया है। सेना इस मुहिम को आगे बढ़ाए और अब आरपार की लड़ाई लड़े। ताकि, पूरे विश्व को भी एक संदेश मिल जाए।
-सेवानिवृत्त कर्नल अमूल्य मोहन, राजपूत रेजीमेंट
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पूर्व सैन‌िक - फोटो : amar ujala
सरहद पर सेना ने जो ऐतिहासिक कदम उठाया है, उससे एक वाकया याद आ गया है। रूसी टूरिस्टों को इराकी आतंकवादियों ने कब्जे में ले लिया था। उस समय रूस की सेना ने हौसला दिखाते हुए आतंकवादियों के सरदार को धर दबोचा और अपने टूरिस्टों को छुड़वा लिया था। ऐसे ही शौर्य का परिचय भारतीय सेना ने भी दिखाया है। यह न केवल मनोबल बढ़ाने वाला कदम है, बल्कि इससे देश की वैश्विक स्तर पर अलग इमेज व पहचान बनेगी। पर, मैं अभी भी कहूंगा कि हमें आतंकवाद के मामले में इजरायल से सबक लेने की जरूरत है।
-सेवानिवृत्त कर्नल आरएस भदौरिया, पैरा स्पेशल फोर्सेस
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पूर्व सैन‌िक - फोटो : amar ujala
व्हीलचेयर पर बैठा हूं। पैरों से लाचार हूं, लेकिन हौसले बुलंद हैं।  पाकिस्तान को जिस तरह भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया है, उस पर सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि ‘लाचार होने के बावजूद आज जमकर झूमने-नाचे का दिल कर रहा है।’ मैं तो मोदी सरकार और सेना को इस ऐतिहासिक कदम के लिए बधाई देना चाहता हूं। सेना ने जैसे को तैसा की  कहावत को चरितार्थ किया है, इससे बढ़कर खुशी मेरे लिए कुछ और हो ही नहीं सकती।
-सेवानिवृत्त कर्नल अजीत सिंह, आर्म्ड यूनिट
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