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आरोपों से घिरी रहने वाली पुलिस का एक रूप ये भी, तस्वीरें देख आप भी कह उठेंगे 'वाह'

Wed, 28 Mar 2018 01:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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बच्चे को पुचकारते सीओ - फोटो : amar ujala
लखनऊ में दुधमुंहे ओम के लिए गरीबी नासूर बनने की अमर उजाला की खबर पर खाकी वालों का दिल पसीज गया। सीओ व इंस्पेक्टर ने तंगहाली से जूझ रही नानी की मंगलवार को आर्थिक मदद की और बच्चे को गोद में लेकर काफी देर तक दुलराया। उसकी बूढ़ी नानी को ढांढस बंधाया। इससे पहले बच्चे की परवरिश को लेकर परेशान नानी ने उसे जेल में बंद मां को सौंपने के लिए कोर्ट में अर्जी दी। 
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अपने मासूम बेटे के साथ मां - फोटो : amar ujala
मालूम हो पुराना हैदरगंज निवासी अनिल उर्फ अजय गुप्ता की पत्नी पायल गुप्ता ने पड़ोसी अंशु उर्फ आशुतोष गुप्ता की मदद से फतेहपुर के एक नि:संतान दंपती को 60 हजार रुपये में अपने दुधमुंहे बेटे ओम को बेचा था। 
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बच्चे को पुचकारते सीओ - फोटो : amar ujala
मासूम ओम की नानी की आर्थिक स्थिति से बेखबर सीओ बाजार खाला अनिल यादव और इंस्पेक्टर सुजीत कुमार दुबे ने दुधमुंहे के लिए गरीबी नासूर बनने की अमर उजाला में खबर पढ़ी। दोनों को चूक का अहसास हुआ। तंगहाली से जूझ रही बुजुर्ग महिला को नाती के साथ सीओ के ऑफिस में बुलाया। आंखों में आंसू भरे महिला अपनी व्यथा सुनाते हुए नाती की परवरिश में असमर्थता जताने लगी।

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आर्थिक मदद करते सीओ एवं इंस्पेक्टर - फोटो : amar ujala
सीओ व इंस्पेक्टर ने आर्थिक मदद की। पैसे लेने से हिचक रही महिला ने दुधमुंहे को आगे बढ़ाया। सीओ के हाथ से रुपये पकड़ने के साथ अबोध ओम उन्हें टकटकी लगाकर देखने लगा। नजरें मिलते ही सीओ व इंस्पेक्टर पसीज गए। सीओ ने हाथ बढ़ाए और बच्चे को गोद में ले लिया। परवाह नहीं थी कि बच्चे के तन पर कच्छा नहीं है।
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आर्थिक मदद करते सीओ - फोटो : अमर उजाला
दुधमुंहे को दुलराने के साथ इंस्पेक्टर से उसकी परवरिश को लेकर चर्चा की। कहा कि इतने छोटे बच्चे की सही देखभाल सिर्फ मां कर सकती है। कुछ बड़ा होने पर ही कोई और संभाल पाएगा। इंस्पेक्टर का कहना था कि ओम को उसकी मां पायल गुप्ता ने ही बेचा था। पिता ने बच्चे को ले जाने से मना किया। इस पर नानी की सुपुर्दगी में दिया गया।
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ओम - फोटो : amar ujala
सीओ को दुधमुंहे ओम को दुलराते देख बुजुर्ग नानी रो पड़ी। बोली साहब, मेरा नाती है। खून का रिश्ता है लेकिन तंगहाली उसे साथ रखने में रोड़ा बनी है। कहा कि उसके पति ईंट भट्ठा के मालिक थे। व्यापार में घाटे पर पति बीमार पड़े। मधुमेह के चलते पैर का जख्म इतना बढ़ा कि पैर काटना पड़ा। इसके बाद पत्नी को मजदूरी करते बर्दाश्त नहीं कर सके और घर छोड़कर चले गए। पायल को पति ने छोड़ दिया था। इस पर दोगुनी उम्र के अजय उर्फ अनिल गुप्ता से शादी की थी। एक अन्य बेटी की 8 फरवरी को दहेज की खातिर हत्या कर दी गई। छोटी बेटी जैसे तैसे अपने चार बच्चों की परवरिश करती है। 
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सीओ एवं इंस्पेक्टर - फोटो : amar ujala
बुजुर्ग महिला ने बताया कि बच्चे की परवरिश के चक्कर में काम पर नहीं जा पा रही है। नौकरी छूटने पर फांके की नौबत आ जाएगी। पहले दिन किसी तरह उसके लिए दूध मंगाया था और सोमवार को अमर उजाला के संवाददाता ने मदद की। वह बच्चे को लेकर सुबह कचहरी गई थी। एक वकील की मदद से बच्चे को उसकी मां को सौंपने जाने के लिए कोर्ट में अर्जी दी है। 
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ओम को गोद में लिए मां - फोटो : amar ujala
सीओ व इंस्पेक्टर ने सहमति जताते हुए कहा कि बच्चे पर जेल प्रशासन की नजर रहेगी। आरोपी पायल गुप्ता को उसकी गलती का अहसास कराया जाएगा। बच्चा कुछ बड़ा होने पर उसकी परवरिश की अन्य व्यवस्था कराई जाएगी।
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