अगर किसी बच्चे के दांत हादसे में जड़ से उखड़ जाएं तो घबराने की जरूरत नहीं है। समय रहते ही बच्चे को केजीएमयू ले आएं तो वह दांत दोबारा लगाया जा सकेगा। जी हां, सही पढ़ा आपने। आपको बस बच्चे के उखड़े दांत सुरक्षित रखने हैं।
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ये कहना है केजीएमयू स्थित डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक एंड प्रिवेंटिव डेनटिस्ट्री के प्रो. राकेश कुमार चक ने दी। वह शनिवार को विभाग के गोल्डन जुबली कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संजय गांधी पीजीआई के निदेशक डॉ. राकेश कपूर थे।
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प्रो. राकेश कुमार चक ने बताया कि जब बच्चे का खेलते समय या दुर्घटना में दांत जड़ से टूट जाता है तो ऐसे बच्चों के अभिभावक समय रहते विभाग पहुंच जाएं तो उसी निकले हुए दांत को दोबारा लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि किसी बीमारी या अथवा कैविटी के कारण दांत खराब हो रहे हो तो उसे भी बचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि विभाग इस बात पर ज्यादा जोर दे रहा कि किसी भी प्रकार से बच्चों के दांत बचाए जा सकें। उनमें इप्लांट न लगाना पड़े। डॉ. राकेश कुमार चक ने बताया कि अभी केजीएमयू में स्टेम सेल से दांत उगाने की प्रक्रिया पर शोध हो रहा है। आने वाले समय में जिन बच्चों में दांत किसी बीमारी अथवा दुर्घटना में चले गए होंगे, उनमें भी स्टेम सेल के माध्यम से प्राकृतिक तरीके से दांत उगाए जा सकेंगे।