ये कहानियां हैं उन बच्चों की जिनके सामने शारीरिक और मानसिक चुनौतियां हैं। मां का आंचल मिला न पिता का साया। शरणालय में रहते हैं। आम बच्चों से बिल्कुल अलग हालात, फिर भी जोश व हौसला कम नहीं। उन्हें देख बस यही कहा जा सकता है उनकी उड़ान को हौसले के पंख लगे हैं। बाल दिवस पर ऐसे बच्चों के हौसले को अमर उजाला का सलाम। एक रिपोर्ट...।
ये बच्चे विशेष हैं। मल्टीपल चैलेंज्ड हैं। फिर भी उनमें हौसला है चुनौतियों के पार जाने की। जज्बा है कुछ करने की। ललक है कुछ सीखने की। शूटिंग रेंज में निशाने लगाने हों, कैफेका संचालन हो, खेलकूद हो या फिर आर्ट एंड क्राफ्ट हो...। अपने हुनर से ये चौंकाते हैं। मन मोह लेते हैं।
जिम में फिटनेस के गुर सीख कर वे न केवल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे, बल्कि पुरस्कार भी जीत रहे हैं। जानकीपुरम् विस्तार स्थित दृष्टि सामाजिक संस्थान में ऐसे एक-दो नहीं बल्कि 200 बच्चे रहते हैं। हाईकोर्ट द्वारा नामित इस संस्थान में हाईकोर्ट और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश पर बच्चे भेजे जाते हैं।